अनमोल सूत्र

वास्तु के महत्वपूर्ण सूत्र
- श्रीमती राखी चतुर्वेदी

1. जीने की सीढियों के नीचे शौचालय और पूजाघर नहीं रखना चाहिए.
2. मुख्य भवन पर प्रात: ९ बजे से दोपहर ३ बजे तक वृक्षों की छाया गिरे तो अशुभ एवं कष्टदायक होती है.
3. चौकीदार एवं गार्ड के लिए स्थान गृह सीमा के प्रवेश अहाते के समीप बनाना चाहिए. इनके आवास घर की सीमा के अंतर्गत बाएं भाग में होने चाहिए.
4. भवन में सीढ़ी के द्वार पूर्व या दक्षिण दिशा में रखना शुभ फलदायक होता है. भवन के पश्चिम या उत्तर भाग में दाई और निर्माण उत्तम होता है.
5. पार्किंग हेतु उत्तर – पश्चिम स्थान प्रयोग में लाना चाहिए.
6. जिस भूमि पर भवन – निर्माण करना हो, उस स्थान पर मिट्टी खोदकर, बदलने और नई मिट्टी डालने पर भूमिगत किसी प्रकार का दोष ठीक हो जाता है.
7. ईशान कोण ईश्वर का स्थान होता है. भवन में ईशान कोण में शौचालय अथवा गंदगी होना कष्टदायक होता है.
8. प्रवेश द्वार उत्तर अथवा पूर्व में होना श्रेष्ठ है, मध्य में द्वार कदापि नहीं करना चाहिए. मध्य में द्वार होने से कुलनाश होता है.
9. गृहस्वामी का कक्ष पश्चिम अथवा दक्षिण दिशा में ही बनायें. जहाँ तक हो सके दक्षिण – पश्चिम नैऋत्य कोण में बनायें. गृहस्वामी का भारी – भरकम सामान भी इस दिशा में रखा जा सकता है.
10. घर का विस्तार चारों दिशाओं में करना उत्तम है. केवल दक्षिण – पश्चिम में अथवा दक्षिण – पूर्व में विस्तार करने से धनहानि, क्लेश, आगजनी, दुर्घटना, चोरी, डकैती, स्वास्थ्य-हानि, अनावश्यक चिंता आदि होती है.
11. जहां तक हो सके शौचालय की सीट उत्तर-दक्षिण के अनुसार रखें. टैंक उत्तर-पश्चिम या दक्षिण-पूर्व कोने में रखा जा सकता है.
12. कूड़ादान सड़क की बत्ती या खंभा या बड़ा प्रमुख द्वार दरवाजे के सामने न हो.
13. रसोईघर, शौचालय तथा पूजाघर एक-दूसरे के आस-पास न बनायें.
14. इमारत की ऊंचाई नैऋत्य से ईशान की ओर घटती हुई होनी चाहिए.
15. मुख्यद्वार पर मूर्ति लगाना शुभ होता है.
16. घर का उत्तर-पूर्वी कोना घर के मुख के सामान होता है, अत: इसे सदैव साफ़-सुथरा रखना चाहिए.
17. घर में पौधा लगाने के लिए कीटाणुनाशक के पानी में सेंधा नमक अथवा समुद्र से प्राप्त नमक मिला लेना चाहिए. इससे कीड़े-मकोड़े का प्रभाव जाता रहता है.
18. विद्यार्थी उत्तर अथवा पूर्व दिशा की ओर मुंह करके पढ़े-लिखें.
19. किसी बीम के नीचे न तो बैठें न सोयें.
20. युद्व, अपराध, अशांति, आक्रोश या कष्ट का चित्रण करती हुई कोई पेंटिंग घर के मुख्य कमरे में न लगायें.
21. घर का मुख्यद्वार इस प्रकार निर्मित कराएं कि उस पर किसी की छाया न पड़े.
22. वर्षा का पानी या घर की नाली उत्तर-पूर्व या पूर्व-उत्तर की ओर बहनी चाहिए.
23. भूमि टेढ़ी हो तो निवास करने वाला दरिद्र हो जायेगा.
24. भूमि आड़ी-तिरछी होने पर, निवास करने वाले का कुलनाश होने की संभावना होती है.
25. भूमि का ढाल उत्तर दिशा की ओर हो तो वंशवृद्वि धनागमन योग होता है.
26. भूमि का ढाल ईशान कोण में हो तो रत्न (लक्ष्मी) लाभ होता है.
27. भूमि का ढाल वायव्य कोण की ओर हो तो परिवार में मृत्यु की संभावना सदैव बनी रहती है.
28. भूमि का ढाल अग्नि कोण की ओर हो तो शोक होता है.
29. ईशान कोण में भूमि एवं भवन के ढालदार होने पर ज्ञान-प्राप्ति, मानसिक शांति, धर्म-कर्म में अभिरुचि एवं वृद्वि होती है.
30. पश्चिम दिशाओं में भूमि एवं भवन के ढाल संतति-हानि एवं नाशकारक होता है.
31. भूमि एवं भवन का निर्माण सदैव पूर्व या उत्तरी और ढालदार रहना शुभकारक होता है.
32. भूमि या भवन के दक्षिण-पश्चिम भाग में गढ्डा होने पर वह भूमि या भवन अपयश, अर्थहानि तथा अवनति कारक होता है.
33. दक्षिण में भूमि एवं भवन के ढालदार होने पर मृत्यु कारक योग होता है.
34. नैऋत्य कोण में ढाल होने पर धन हानि होती है.

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