आयुर्वेद

आयुर्वेद
पं. शशि मोहन बहल


इन दिनों दुनिया भर में योग व आयुर्वेद की लोकप्रियता बढ़त पर है. ‘योग’ से मिलने वाले लाभों की पुष्टि वैज्ञानिक भी कर चुके है, इसी तरह आयल थेरैपी, मसाज थेरैपी और एरोमा थेरैपी भी विश्व को आयुर्वेद की ही देन है. ये सभी चिकित्सा पद्वतियां अनेक रोगों में कारगर हैं.
आयुर्वेद
यह दुनिया की सबसे प्राचीन चिकित्सा पद्वति है. इसमें विभिन्न वनस्पतियों का औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है. इस चिकित्सा पद्वति से मरीज पर किसी तरह का साइड एंड आफ्टर इफेक्ट नहीं पड़ता. आयुर्वेद पुरानी बीमारियों में विशेष लाभप्रद है.
आयल थेरैपी
आयल थेरैपी का वर्णन आयुर्वेदिक ग्रंथों में उपलब्ध है. गौरतलब है कि रूस के डा. कराच ने 1981 में न्यूयार्क में आयोजित हुई अंतर्राष्ट्रीय कैंसर संगोष्ठी में कहा था कि आयल थेरैपी कैंसर रोग में उपयोगी है. इस तरह डा. कराच ने आयुर्वेद में वर्णित तेल चिकित्सा की वैज्ञानिकता की पुष्टि की. आयुर्वेद में तेल को मुख में भरकर 4-5 मिनट तक रखने के बाद उसे थूक देने की क्रिया को ‘गंडूश’ कहा जाता है. इससे मुंह के छाले व घाव ठीक हो जाते हैं.
मसाज थेरैपी
तेल की शरीर पर मालिश को मसाज थेरैपी के नाम से जाना जाता है. इस थेरैपी में सिर दर्द, वात-रोग, त्वचा सम्बन्धी विकार दूर होते हैं.
एरोमा थेरैपी
फूलों की सुगंध द्वारा विभिन्न रोगों जैसे सिरदर्द, हिस्टीरिया, अवसाद और तनाव आदि का उपचार किया जाता है. इस पद्वति को ‘एरोमा थेरैपी’ का नाम दिया गया है.

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