के. पी .

कृष्णामूर्ति पद्वति : चमत्कारिक सिद्वांत

दक्षिण भारत में जन्मी कृष्णामूर्ति पद्वति में अनेक ऐसे चमत्कारिक सिद्वान्तों के बारे बताया गया है जिसकी सहायता से सटीक भविष्यवाणी किया जाना संभव है. ऐसे एक चमत्कारिक सिद्वांत के बारे में प्रस्तुत लेख में बताया जा रहा है. ज्योतिष में कुंडली मिलन को महत्वपूर्ण मानकर उसके सन्दर्भ में अनेक उपयोगी दिशा निर्देश दिए गए हैं तथा भावी वर वधू की कुंडली मिलान के अनेक सूत्र बताये गए हैं. सामान्य तौर पर कुंडली मिलान में अष्टकूट गुण मिलान तथा मांगलिक मिलान का विचार किया जाता है. इन दोनों मिलानों के द्वारा भावी वर वधू के जीवन पर एक दूसरे के ग्रहों के शुभ या अशुभ प्रभावों का आंकलन किया जाता है. पारम्परिक भारतीय ज्योतिष में यह विवरण नहीं मिलता कि कुंडली मिलान प्रस्तुत कुंडलियों के जातकों का विवाह होना संभव है या नहीं. इस सन्दर्भ कृष्णमूर्ति पद्वति का सिद्वांत बहुत सटीक व चमत्कारिक फल देने वाला है. जिसकी सहायता से जाना जा सकता है कि जिन व्यक्तियों कि कुंडलियां मिलायी जा रही हैं उनका विवाह होगा अथवा नहीं. यदि एक लड़के की कुंडली के साथ अनेक लड़कियों की कुंडलियां मिलान हेतु आयीं हो लड़के अथवा लड़की का विवाह उनमें से किस कुंडली वाले लड़की या लड़के से होगा या उनमें से किसी से भी नहीं होगा. इसका निर्णय कृष्णमूर्ति पद्वति के आधार पर किया जा सकता है.
यदि लड़के की जन्मकुंडली के शासक ग्रह लड़की की वर्तमान दशा एवं अन्तर्दशा एवं प्रत्यंतर दशा से मेल खाते हों लड़की की जन्मकुंडली के शासक ग्रह लड़के की वर्तमान दशा एवं अन्तर्दशा एवं प्रत्यंतर दशा से मेल खाते हों तो ऐसे लड़के लड़की का विवाह अवश्य होता है. यदि लड़के की कुंडली के शासक ग्रह लड़की की वर्तमान दशाओं वाले ग्रह नहीं हो तथा लड़की की कुंडली के शासक ग्रह लड़के की वर्तमान दशाओं के ग्रह नहीं हो तो उनमें विवाह नहीं होता. इसे अग्रलिखित उदहारण से समझा जा सकता है -
लड़के की कुंडली का विवरण
शासक ग्रह
जन्म दिन का स्वामी – शनि
चन्द्र राशि का स्वामी – मंगल
चन्द्र नक्षत्र स्वामी – शनि
लग्न स्वामी – गुरु
लग्न नक्षत्र स्वामी – शनि
महा दशा स्वामी – शुक्र
अन्तर्दशा स्वामी – चन्द्र
प्रत्यंतर दशा स्वामी – मंगल
लड़की की कुंडली का विवरण
शासक ग्रह
जन्म दिन का स्वामी – शुक्र
चन्द्र राशि का स्वामी – शुक्र
चन्द्र नक्षत्र स्वामी – चन्द्र
लग्न स्वामी – मंगल
लग्न नक्षत्र स्वामी – केतु
महा दशा स्वामी – गुरु
अन्तर्दशा स्वामी – शनि
प्रत्यंतर दशा स्वामी – शनि
जन्म कुंडली मिलान हेतु आयी लड़के एवं लड़की की कुंडलियों में निम्नलिखित विवरण को नोट कर लें -
इन दोनों कुंडलियों में शासक ग्रहों तथा दशाओं में ऊपर बताया गया सूत्र पूर्ण रूप से लागू होता है. लड़के की कुंडली में जो शासक ग्रह हैं वे ग्रह ही लड़की की दशा अन्तर्दशा के ग्रह हैं तथा लड़की की जन्मकुंडली के शासक ग्रह की दशाएं लड़के के जीवन में चल रही है इससे स्पष्ट होता है कि लड़के एवं लड़की का विवाह होना निश्चित है. यदि एक साथ अनेक कुंडलियां मिलाने हेतु आ जायें और उनमें से एक कुंडली के साथ अनेक कुंडलियां अच्छी तरह मिल भी रही हों तो ऐसी स्थिति में कृष्णामूर्ति पद्वति के इस चमत्कारिक सिद्वांत के द्वारा यह जाना जा सकता है कि विवाह सम्बन्ध किस कुंडली वाले जातकों के मध्य होना सुनिश्चित है.

दुर्घटना ! क्यों और कैसे ?
पं. रवीन्द्र नाथ चतुर्वेदी
किसी भी कुंडली में भावों के उपनक्षत्र भाव स्थित ग्रहों से अत्यधिक बलशाली होते हैं. कुंडली के 4, 8, 12 भावों के उपनक्षत्रों की दशा, अंतर, प्रत्यंतर में दुर्घटनायें होती हैं, जैसे गिरना, अंग भंग होना, सड़क दुर्घटना इत्यादि. यह दुर्घटनाएं तभी होती हैं जब चन्द्र भी 4, 8, 12 भावों के उपनक्षत्रों की राशि, नक्षत्र एवं उपनक्षत्र पर गोचर करता है. यदि 4, 8, 12 भावों के उपनक्षत्र मारक या बाधक भावों का सूचक होता है तो दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है.
मेरे एक परिचित अपनी जन्मकुंडली जो कृष्णामूर्ति पद्वति से बनी थी, लेकर आए. कुंडली में गुरु दशा, शुक्र अन्तर्दशा तथा बुध का प्रत्यंतर चल रहा था. मेरी नजर 4, 8, 12 भावों के उपनक्षत्रों पर पड़ी, वह भी गुरु और शुक्र ही थे. मैंने उस सज्जन से कहा कि बुध के प्रत्यंतर में आप स्कूटर, वाहन आदि न चलायें. दुर्घटना होना प्राय: निश्चित है. वह कहने लगे, अरे छोड़िये साहब, 20 वर्षों से स्कूटर चला रहा हूं एक खरौंच तक नहीं लगी. मैंने कहा – अब यह तो समय ही बताएगा, वह चले गए. तीन दिन बाद ही किसी ने मुझे बताया कि उन सज्जन का रात को 8 बजे एक्सीडेंट हो गया. एक बच्चे को बचाने में उनका स्कूटर बिजली के खम्बे से टकरा गया और वह अस्पताल में हैं और उनकी बायीं आंख चली गयी. मैंने रात्रि 8 बजे की कुंडली बनाई और देखा कि चन्द्र मीन राशि में रेवती नक्षत्र में शुक्र के उप नक्षत्र में है जो 4, 8, 12 के उपनक्षत्र थे व लग्न भी धनु स्वामी गुरु तथा शुक्र के नक्षत्र व बुध के नक्षत्र में है जो 4, 8, 12 के उपनक्षत्र हैं.
कृपया ध्यान दें – 4, 8, 12 भावों के उपनक्षत्र यदि शुक्र-शनि-शुक्र या शुक्र-बुध-शुक्र या चन्द्र-सूर्य-चन्द्र या चन्द्र-मंगल-चन्द्र या शनि-बुध-शनि हों तो ऐसे जातक के जीवन में कोई छोटी या बड़ी दुर्घटना नहीं होती जैसे शुक्र-शनि-शुक्र, क्योंकि शुक्र के भावों 2 व 7 में शनि का कोई नक्षत्र नहीं होता और शनि के भावों 10 व 11 में शुक्र का नक्षत्र नहीं होता है. इसी प्रकार उपरोक्त योगों में एक के भावों में दूसरे का कोई नक्षत्र नहीं होता है.
पुन: यदि 1, 5, 9 भावों के उपनक्षत्रों के भाव में यदि उनका नक्षत्र हो तो किन्हीं भी परिस्थितियों में अप्राकृतिक व असामयिक मृत्यु नहीं होती -
उदाहरणार्थ यदि 1, 5, 9 भावों के उपनक्षत्र बुध-शुक्र-शनि हों तो उसकी असामयिक मृत्यु नहीं होगी, क्योंकि बुध के घर मिथुन में गुरु का नक्षत्र पुनर्वसु होता है और गुरु के घर मीन में बुध का नक्षत्र रेवती होता है तथा शनि के घर कुम्भ में गुरु का नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद होता है.
यदि 1, 5, 9 भावों के उपनक्षत्र शनि-बुध-शनि हों तो इनके भावों में दूसरे का नक्षत्र नहीं होता है. इसका अर्थ है कि ऐसे ग्रहों में जातक का जीवन बचाने की क्षमता नहीं होती है.
जन्म समय सही करना -
जब कभी औजारों से काम करते समय यदि कहीं चोट लग जाये या चाकू या ब्लेड से पेंसिल बनाते समय अंगुली कट जाये तो उसी समय घड़ी का समय नोट कर लें. उस समय में जो लग्न स्वामी, नक्षत्र स्वामी तथा उपनक्षत्र स्वामी होंगे वही उसकी कुंडली में 4, 8, 12 भावों के उपनक्षत्र होंगे. यदि न हों तो कुंडली में लग्न को थोड़ा-थोड़ा आगे पीछे करें ताकि 4, 8, 12 भावों के उपनक्षत्र वही हो जाएं जो चोट लगते समय की लग्न के राशि स्वामी, नक्षत्र स्वामी और उपनक्षत्र स्वामी थे. कुंडली का जन्म समय ठीक हो जायेगा.
एक कुंडली देखिये – जन्म दिनांक 18.02.1973 समय प्रात: 05:48 स्थान- वृन्दावन. इनके 4, 8, 12 भावों के उपनक्षत्र मंगल, शनि व चन्द्र हैं. इनको चन्द्र दशा, शनि अंतर, मंगल का प्रत्यंतर 20.06.2004 से प्रारम्भ होगा. दिनांक 21.06.2004 को चन्द्र कर्क राशि स्वामी चन्द्र, पुष्य नक्षत्र स्वामी शनि व उपनक्षत्र स्वामी मंगल में प्रात: 8:30 बजे होगा एवं लग्न भी प्रात: 8:30 पर कर्क में स्वामी चन्द्र तथा पुष्य नक्षत्र स्वामी शनि तथा मंगल के उपनक्षत्र में आते ही दुर्घटना दे देगी. मैंने इस सज्जन को जो अभी आसाम में है 15.06.2004 को फोन द्वारा सूचित कर दिया था कि वह दिनांक 21.06.2004 को दोपहर तक किसी वाहन का प्रयोग न करें तथा सुरक्षित स्थान पर ही रहे. 22.06.2004 को उनका फोन आया कि उनका पड़ोस का मित्र उन्हें अपने घर पैदल ही ले जा रहा था तो अपने गेट से निकलते ही एक ऑटो से टकरा गए.

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