ज्योतिष और सौंदर्य

ज्योतिष और सौंदर्य

आभूषण पहनने का चलन उतना ही पुराना है जितना कि मानव सभ्यता का विकास. आदिकाल से अब तक मनुष्य आभूषणों के प्रति आकर्षित रहा है. और अपनी क्षमता के अनुसार वह आभूषण धारण करता है. आभूषण अपने शरीर को सुन्दर, सुडौल एवं स्वस्थ रखने के लिए केवल महिलाएं ही धारण नहीं करती, बल्कि प्राचीनकाल से ही पुरुष भी उन्हें किसी न किसी रूप में धारण करते आये हैं. लोग समझते है कि आभूषण धारण करने की परंपरा केवल सौन्दर्य में वृद्वि करने के लिए चली आ राही है. जबकि वास्तविकता यह है कि आभूषण धारण करने से अनजाने में ही हमारी सेहत में सुधार हो जाता है. विज्ञान के आधुनिक शोधों से भी आभूषणों से स्वास्थ्य लाभ की पुष्टि हो चुकी है.

महिलाओं में नाक में आभूषण धारण करने की परम्परा प्राचीन काल से चली आ रही है. नाक का मस्तिष्क से भी सीधा सम्बन्ध है, इससे ज्ञान तंतुओं का भी पोषण होता है. लौंग और नथ पेट ठीक रखने में सहायता करते हैं. ज्योतिष में लाल किताब के अनुसार पुरुषों को कुछ विशेष ग्रह स्थिति के कुंडली में विद्यमान होने पर नाक छिदवाने का परामर्श दिया जाता है. जिन व्यक्तियों को बार बार असफलता का सामना करना पड़ रहा हो उन्हें नाक छिदवा लेनी चाहिए. किन्तु नाक में कुछ भी पहनना नहीं चाहिए. अस्थमा के रोगियों को एक्यूपंचर पद्वति से कान में छेद कर तांबे का छल्ला पहनाया जाता है. आदमियों के कान जरा नीचे छेदे जाते हैं, जिनसे उनकी आंखें ठीक रहती हैं. औरतों के कान जरा ऊपर से छेदे जाते हैं, जिससे उनका गला और जीभ स्वस्थ रहती है. जो औरतें भारी झुमके पहनती हैं, वे झुमके में ऊपर से एक पतली जंजीर लगाकर कान के ऊपर से निकाल देती हैं, उससे कान के ऊपर के भाग पर दवाब पड़ता है. उससे उनका पित्ताशय और योनिमार्ग स्वस्थ रहता है. चूड़ियाँ और कड़े धारण करने से दिल, सांस, गला, गर्दन, मस्तिष्क, प्रोस्टेट, जननांग, कमर के निचले हिस्से का दर्द ठीक रहता है. दोनों भौंह के बीच टीका या बिंदी लगाने से शरीर की ऊर्जा संतुलित रहती है और फेफड़ों को शक्ति मिलती है. सिर में लगा सिंदूर मस्तिष्क को शीतल व शांत रखता है.
ज्योतिष विज्ञान के अनुसार ग्रहों की शांति के लिए अंगूठियों, ताबीजों, लाकिटों का प्रचलन किसी न किसी रूप में सदैव रहा है. ज्योतिषी विशेष नग की अंगूठी, व्यक्ति विशेष को धारण करने की सलाह देते हैं. अलग-अलग अंगुलियों में अंगूठियां पहनने से उसके शरीर पर अलग-अलग असर होता है. सोने की अंगूठियां पहनने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्वि होती हैं. सोना पहनने से विषों का प्रभाव शरीर पर नहीं होता और यदि होता है तो कम होता है.
छोटी अंगुली में अंगूठी पहनने से शरीर में ऊर्जा उत्पन्न होती है. दिल, गर्दन, कान, रीढ़ की हड्डियां स्वस्थ रहती हैं. अनामिका अंगुली में अंगूठी कान, तंत्रिका तंत्र, पाचन शक्ति, सेक्स व फेफड़ों को शक्ति प्रदान करता है और साइटिका के दर्द में आराम पहुंचता है. मध्यमा अंगुली में अंगूठी गला, तंत्रिका तंत्र, ह्रदय, आंखें और जुकाम में आराम पहुंचाती हैं. बुखार में भी आराम आता है. तर्जनी अंगुली में अंगूठी पहनने से जुकाम, तंत्रिकातंत्र, सवाईक़ल, मस्तिष्क, आंखें व चेहरे को सुन्दरता प्रदान करती हैं और बुखार में भी आराम आता है. अंगूठे में छल्ला पहनने से दिमाग, हार्मोन्स, फेफड़ों, गला, सवाईक़ल, टोंसिल्स में आराम पहुंचता है.
पायल व पैरों में पहने जाने वाले कड़े, पेट, कमर, पैरों, पिंडलियों, साइटिका के दर्द में आराम पहुंचाते हैं और हार्मोन्स, ब्लडप्रेशर, फेलोपियन ट्यूब्स, प्रोस्टेट, ओवरी, इन्जाइना, दमा, जुकाम में आराम आता है. गले में पहनी माला छाती के एक्यूप्रेशर बिन्दुओं पर असर डालती है. उनके दबने से चेहरे पर निखार आता है. रत्न जड़ित अंगूठियां, हार, मालाएं, ग्रहों की शांति के लिए भी पहने जाते हैं जैसे सूर्य ग्रह को प्रभावित करने के लिए माणिक्य, चंद्र ग्रह के लिए मोती, मंगल ग्रह के लिए मूंगा, बुध के लिए पन्ना, गुरु के लिए पुखराज, शुक्र के लिए हीरा, शनि के लिए नीलम, राहु के लिए गोमेद और केतु के लिए लहसुनिया धारण किया जाता है.
कमल के फूलों को धारण करने से शरीर शीतल रहता है. फोड़े, फुंसी आदि शांत होते हैं, शरीर पर विष का प्रभाव कम होता है. गुलाब, बेला आदि के आभूषण ह्रदय को प्रिय होते हैं, इससे मोटापा कम होता है.

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