भूत-प्रेत

श्मशान में तंत्र साधना क्यों ?
तंत्र विद्या की प्राप्ति गहन साधना के बिना संभव नहीं है और यह साधना कर पाना हर व्यक्ति के बस की बात नहीं है. दृढ इच्छा शक्ति, एकाग्रता व संकल्प शक्ति का धनी व्यक्ति ही तंत्र साधना में सफल हो सकता है. साधक का शरीर स्वस्थ हो, आत्मा निर्मल हो और चरित्र उज्जवल, यह आवश्यक है.
सामान्यत: तंत्र विद्या को लोग घातक व दूसरों के अनिष्ट के लिए काम में लायी जाने वाली शक्ति मानते हैं, पर ऐसा नहीं है. तंत्र विद्या का व्यापक उदारवादी नजरिया है तथा इसका उददेश्य रचनात्मक है, परकल्याणक है. तंत्र शास्त्रों में महर्षियों द्वारा अनुभूत तंत्र का विवरण हमें प्राप्त होता है. तंत्र साधना हमें शत्रुओं से सुरक्षित करती है. धन-यश-वैभव व प्रभुता प्रदान करती है. पर इस हेतु मनोयोग के साथ साधना करनी आवश्यक होती है.
मात्र तंत्र शास्त्र का अध्ययन कर कोई भी व्यक्ति तंत्र विद्या को हासिल नहीं कर सकता है. इसके लिए तंत्र साधना करनी पडती है. साधकों को कठोर परिश्रम करना पड़ता है. तंत्र की साधना के लिए सबसे अच्छा स्थान शमशान को माना गया है. श्मशान एक ऐसा स्थान होता है जहां प्रवेश करते ही हमारे मन में वैराग्य के भाव आने शुरू हो जाते हैं. हमें संसार की नश्वरता का आभास भी हो जाता है और वही व्यक्ति तंत्र साधना करने में सफल हो पाता है जिसके मान में वैराग्%

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