भृंगु संहिता

महर्षि भृगु प्रवचन
उमेश चन्द्र शुक्ला
‘भृगु संहिता’ हमेशा से ही भारतीय ज्योतिष प्रेमी तो क्या ज्योतिषियों के लिए भी रहस्य कौतूहल एवं जिज्ञासा का केंद्र रही है. कहा जाता है कि ‘भृगु संहिता’ में व्यक्ति के नाम या नामाक्षर से लेकर जीवन की सभी घटनाएं ऐसे लिखी होती हैं मानो किसी ने जीवन का सारांश कुछ पन्नों में ही समेट दिया हो. एक ओर जहां कुछ व्यक्ति ‘भृगु संहिता’ के फलों की सच्चाई से अभिभूत हैं तथा अपने अतीत एवं भविष्य की घटनाओं की सटीक भविष्यवाणी के कारण उसे पूर्णतया से स्वीकारते हैं वहीं कुछ व्यक्ति इसके फलादेश को असत्य कहकर इसकी आलोचना भी करते हैं. साथ ही एक तीसरा वर्ग है जो भृगु संहिता के अस्तित्व को ही नकारता है. ज्योतिष वास्तव में एक पूर्ण विज्ञान है तथा इसके फलादेश सूत्रों पर आधारित होते हैं. ‘भृगु संहिता’ भी कोई चमत्कारी वस्तु या ग्रन्थ नहीं है. उससे ज्यादा महत्व उन सूत्रों का है जिनके आधार पर भृगु संहिता का निर्माण हुआ. महर्षि भृगु द्वारा रचित ‘भृगु सूत्रों’ के आधार पर भृगु संहिता पहले हमारे पूर्वज विद्वानों ने तैयार की थी तो क्या उन्हीं सूत्रों के द्वारा नयी भविष्य के लिए उपयोगी भृगु संहिता का निर्माण नहीं किया जा सकता. अवश्य किया जा सकता है आवश्यकता केवल पूर्ण समर्पित प्रयासों की है उन सूत्रों को ढूढने की एवं एकत्रित करने की है जो हमारे विद्वानों के पास संचित हैं. भृगु संहिता से सम्बंधित जिज्ञासाओं के शमन के लिए प्रस्तुत श्रंखला में आगे भी लेख प्रकाशित किये जायेंगें.
ऐ जीव ! ऐसा प्रतीत होता है कि तू डरता है शायद तू मुझे अपने साथ नहीं देखता. केवल यही कारण तेरे भय का है. मैं तुझे विश्वास दिलाता हूं कि मैं तेरे साथ हूं तू यह जान और भय से मुक्त हो जा.
तू घबराता है शायद इसलिए कि तुझे पता नहीं कि तेरे जीवन का रक्षक तेरे साथ है. जिसने तुझको सूर्य, चंद्रमा, जल, वायु तेरे बिना मांगे तेरी रक्षा के लिए दिए हैं, वह रोटी भी देता रहेगा. उसके पास सब कुछ है और सब कुछ रहेगा. तू संदेह मत कर. तू उसके भरे खजानों को देखकर अपने लिए न मिलने का संदेह मत कर.
मैं तुझको विश्वास दिलाता हूं मैं तेरा परम हितैषी हूं तेरा सच्चा मित्र हूं और तेरे दुःख का साथी हूं. क्या मेरा प्रेम तुझे मुझसे प्रेम करने को मजबूर नहीं करता ? क्या मेरी दया तेरे दिल में मेरे लिए वफादारी पैदा नहीं करती ? तू मेरे प्रेम को देखकर मुझसे प्रेम कर और मेरी दया को देखता हुआ मेरा बन जा.
ऐसे न चल कि मुझे तुझको जबर्दस्ती वापस लाना पड़े. तुझे उसमें कष्ट होगा और मैं भी इस दुःख से पीड़ित होऊंगा. न देख कि मैं कितना सुन्दर हूं. सब कुछ मेरे पास है
इसलिए तू मुझी को प्रेम करना सीख. मैं अनंत काल तक तेरे पास रहूंगा और तुझको हर एक ख़ुशी देता रहूंगा. मैं हर आनंद का आनंद हूं. मुझसे भिन्न पदार्थ पहले मेरा बनने पर तुझको ख़ुशी दे सकेंगे वर्ना नहीं.
तू संसार के लिए मुझको मत छोड़ ! वह पहले ही तेरे लिए बनाया गया है. वह समयानुसार तुझको मिलता रहेगा. तू मेरी याद कर मैं तुझको सब कुछ दे दूंगा. मैंने संसार को और तुझको एक जरा इशारे (छोटे से संकल्प) से पैदा कर दिया. मुझे इसमें कोई कष्ट न हुआ. अब क्या जीवन रक्षा के सामान देते हुए मुझे कष्ट होगा ?
जब मैं तेरी इच्छा के विरूद्व चलता हूं, तू मुझ पर नाराज होता है और क्या कभी तू अपने मन से भी लड़ा जो नित्य मेरी इच्छा के विरूद्व चलता है.
संसार तुझको अपना स्वार्थ लेकर प्रेम करेगा. और मैं तुझको तेरे ही स्वार्थ पूर्ति के लिए बुलाता हूं मेरा मन तुझे देने को चाहता है. तू मेरे सामने खाली होकर आ ताकि तुझे भर दिया जाये.
तू सब बातों का ध्यान छोड़कर केवल मेरा ध्यान कर और यह तेरा धर्म है. जो कुछ मुझे तेरे लिए करना है वो मैं कर रहा हूं और करता रहूंगा लेकिन अगर तू किसी असमर्थता के कारण उस अपने धर्म को पूरा न करेगा जो मेरे लिए है तो भी मैं तो अपने उस कर्तव्य को पूरा करता ही रहूंगा जोकि मैंने तेरे लिए बना रखा है. मैंने उस समय भी तेरी चिंता कि जब तू अपनी चिंता के योग्य न था बहुत छोटा था मेरे लिए तू अब भी वैसा ही है. विश्वास कर मैं तेरी चिंताओं को दूर करता ही रहूंगा.
जिस प्रकार मैं तुझसे कल का पूजन, कल का स्मरण, ध्यान और याद आज नहीं मांगता, उसी प्रकार तू भी मुझसे कल की आवश्यकताओं की पूर्ति आज मत चाह. मेरी इच्छा है कि तुझको नित्य का सामान दे दूं या आज का आज, कल का कल. जब मैं कुछ नहीं देता तो उसमें भी कुछ दिया ही करता हूं. मेरे लिए कांटे, पुष्प से अधिक सौन्दर्य रखते हैं. जो देता हूं चुपके से लिए जा. मैं तुझसे अधिक तेरी भलाई को जानता हूं और तुझको बड़ा बनाना चाहता हूं.
मैं तुझको विश्वास दिलाता हूं अगर तू अपनी इच्छा से मेरी इच्छा को बड़ा मान ले और आज्ञाओं को अपने मन पर सब्र करके भी मनवाए तो तेरा ह्रदय पवित्र हो जायेगा. तेरे मन में इच्छाएं और उसकी पूर्ति का कष्ट जाता रहेगा. मैं इस संसार को आज्ञा दे दूंगा कि वह तेरी हर बात का ध्यान रखे तेरी हर मुश्किल में काम आए और तुझ पर कोई ऐसी कठिनाई आ जाये कि जिसको संसार भी दूर न कर सके तो मैं सर्व शक्तिमान महान तेज वाला स्वयं आकर तेरे उस कष्ट को दूर कर दूंगा. यह सच है और बिलकुल सच है. तू इस प्रकार हर चिंता से मुक्त हो जायेगा, हर आराम तुझको मिल जायेगा. संसार मेरा है मैं तुझकों दे दूंगा और तेरे हर लोक और परलोक की जरूरतों को मैं पूरी करता रहूंगा, चिंता मत कर.
ॐ शांति शांति शांति.

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