रत्न संसार

आपकी लग्न और आपके शुभ रत्न

जन्मकुंडली के अनुसार ग्रहों की स्थिति को देखकर कोई भी व्यक्ति अपने लिए शुभ रत्नों को जान सकता है. जन्म कुंडली में शुभ भावों के स्वामी ग्रहों के रत्न धारण किये जाते हैं तथा अशुभ भावों के स्वामी ग्रहों के रत्न धारण न करके उनकी शांति, मंत्र जप, पूजा पाठ आदि अन्य उपायों के द्वारा की जाती है. किस व्यक्ति के लिए कौन सा रत्न शुभ होगा और कौन सा रत्न अशुभ होगा प्रत्येक लग्न के लिए पृथक-पृथक शुभाशुभ रत्नों का विवरण दिया जा रहा है -

मेष लग्न
जिन व्यक्तियों का जन्म मेष लग्न में हुआ है उनके लिए मंगल ग्रह लग्न का स्वामी होकर बहुत शुभ ग्रह बन जाता है. अत: मेष लग्न के व्यक्तियों को मूंगा रत्न अवश्य धारण करना चाहिए. मूंगा धारण करने से व्यक्ति अपने साहस और पराक्रम के बल पर सफलता प्राप्त करता है. मेष लग्न के जिन व्यक्तियों में साहस, बल तथा शरीर में मांसलता की कमी हो तो उन्हें अवश्य ही मूंगा रत्न धारण करना चाहिए. मूंगा धारण करने से इन्हें गुप्त धन का लाभ भी प्राप्त होता है. लाटरी, शेयर आदि में सफलता मिलती है. चतुर्थ भाव में कर्क राशि होने के कारण चन्द्र रत्न मोती धारण करना इनके लिए मानसिक एवं पारिवारिक सुख के लिए श्रेष्ठ माना गया है. मेष लग्न में पांचवे घर में सूर्य की राशि सिंह होती है अत: माणिक्य धारण करना भी इनके लिए उन्नतिकारक होता है. संतान सुख, प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता तथा उच्चाधिकारी की कृपा प्राप्त करने के लिए माणिक्य धारण करना चाहिए. मेष लग्न में भाग्य स्थान में धनु राशि होने के कारण इसके स्वामी गुरु का रत्न पुखराज भी शुभ होता है. पुखराज धारण करने से इनका प्रबल भाग्योदय होता है. जीवन में उच्च सफलता तथा यश प्राप्त करने के लिए पुखराज धारण करना आवश्यक है.

वृष लग्न
वृष लग्न के व्यक्तियों के लिए लग्न के स्वामी ग्रह शुक्र का रत्न हीरा धारण करना बहुत शुभ होता है. इसके प्रभाव से जातक के जीवन में धन, वैभव और स्थिरता आती है. युवावस्था में यदि जातक हीरा धारण कर ले तो उसका शीघ्र विवाह होता है. विवादों में विजय के लिए भी हीरा या उसका उपरत्न जरकिन या ओपल धारण करना चाहिए. वृष लग्न में पांचवे घर में बुध राशि कन्या होती है जिसका रत्न पन्ना होता है. पन्ना धारण करने से जातक को प्रेम प्रसंग में सफलता मिलती है. प्रतियोगी परीक्षाओं में अग्रणी रहता है. शिक्षा के क्षेत्र में भी उपलब्धियां मिलती हैं. संतान सुख समय पर मिलता है. वृष लग्न में भाग्य स्थान में शनि की राशि मकर होती है. अत: भाग्योदय के लिए इन्हें शनि रत्न नीलम धारण करना चाहिए. शनि चूंकि कर्म स्थान का स्वामी भी होता है अत: नीलम धारण करने से ऐसे जातक को रोजगार के क्षेत्र में भी सफलता प्राप्त होती है.

मिथुन लग्न
मिथुन लग्न के व्यक्तियों को पन्ना रत्न अवश्य धारण करना चाहिए क्योंकि उनकी लग्न का स्वामी बुध होता है जिसका प्रतिनिधि ग्रह पन्ना है. जीवन में स्थिरता, सफलता और उत्तम स्वास्थ्य के लिए पन्ना रत्न धारण करना अत्यंत आवश्यक है. विद्यार्थी जीवन में धारण करने से जातक को सरलता से शिक्षा प्राप्त हो जाती है. पारिवारिक सुख के लिए भी पन्ना नेक प्रभाव देता है. मिथुन लग्न में पांचवे घर में तुला राशि आती है जिसका स्वामी शुक्र होता है. अत: ऐसे व्यक्ति को हीरा या उसका उपरत्न धारण करना लाभदायक होता है. विशेषकर प्रेम प्रसंग के मामले में हीरा धारण करने से सफलता मिलती है. संतान सुख के लिए भी हीरा या उसका उपरत्न धारण करना शुभ है. मिथुन लग्न में भाग्य स्थान का स्वामी शनि होता है. अत: शनि रत्न नीलम भी धारण किया जा सकता है. शनि यदि जन्म कुंडली में शुभ स्थिति में हो तो ही नीलम धारण करना चाहिए, अन्यथा नहीं. नीलम धारण करने से जातक की वृद्वावस्था सुखमय होती है तथा मध्य आयु के बाद वह शिखर पर पहुँच जाता है.

कर्क लग्न
इन लग्न के व्यक्तियों को चन्द्र रत्न मोती धारण करना बहुत शुभ सिद्व होता है. इसके प्रभाव से उनको शारीरिक व मानसिक सुख प्राप्त होता है. अत्यंत विषम स्थितियों में घिरे होने पर भी मोती धारण करने से स्थितियां धीरे-धीरे अनुकूल बन जाती हैं. कर्क लग्न में पांचवे घर में वृश्चिक राशि आती है जिसका स्वामी मंगल होता है. मंगल को बली बनाने के लिए मूंगा धारण करना चाहिए. इसके शुभ प्रभाव से जातक के जीवन में स्थिरता आती है. उसका व्यक्तित्व प्रभावशाली बनता है. उसे महत्वपूर्ण व्यक्तियों की कृपा मिलती है. पुत्र सुख के लिए मूंगा धारण करना बहुत शुभ होता है. भाग्य स्थान में गुरु की राशि मीन होने के कारण पुखराज धारण करना इस लग्न के व्यक्तियों के लिए भाग्योदयकारी होता है. पुखराज धारण करने से मध्य आयु में ही जातक उच्चस्तरीय सफलता प्राप्त कर लेता है. उसे पुत्र पौत्र आदि का सुख मिलता है. उसके ऊपर चाहे जितनी भी जिम्मेदारियों हों वह उन सभी को समय पर पूर्ण करने में सफल रहता है.

सिंह लग्न
सिंह लग्न के व्यक्तियों को सूर्य रत्न माणिक्य धारण करना चाहिए. माणिक्य धारण करने से आत्मबल प्रबल होता है तथा विषम स्थितियों में जातक शांतिपूर्वक परिस्थितियों का मुकाबला करता है. माणिक्य के प्रभाव से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. सिंह लग्न के जिन व्यक्तियों के स्वभाव में उग्रता हो या जिन्हें शीघ्र क्रोध आ जाता हो. उन्हें माणिक्य नहीं धारण करना चाहिए. सिंह लग्न के पांचवें घर में धनु राशि होने के कारण गुरु रत्न पुखराज धारण करना इनके लिए बहुत शुभफलदायक होता है. ऐसे व्यक्ति को प्रतिष्ठित और महत्वपूर्ण व्यक्तियों की कृपा का प्रसाद मिलता है. पुत्र सुख, प्रेम-प्रसंग तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए भी पुखराज शुभ फल देता है. भाग्य स्थान में मंगल की राशि होने के कारण भाग्योदय के लिए इन्हें मूंगा धारण करना चाहिए. मूंगा धारण करने से युवावस्था में ही इनका भाग्योदय हो जाता है.

कन्या लग्न
कन्या लग्न के व्यक्तियों के लिए लग्नेश बुध का रत्न पन्ना धारण करना जीवन में उन्नति, सफलता और स्थिरता के लिए आवश्यक होता है. विशेषकर आजीविका में सफलता के लिए पन्ना धारण करना चाहिए. विद्यार्थी जीवन में सफलता के लिए पन्ना धारण करना शुभ होता है. प्रेमीजन का सहयोग, प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता तथा संतान पक्ष से सुखद स्थितियों के लिए शनि रत्न नीलम धारण किया जा सकता है. भाग्योदय के लिए इन्हें शुक्र रत्न हीरा या उसके उपरत्न जरकिन या ओपल में से कोई एक धारण करना चाहिए. यदि युवावस्था में शुक्र रत्न हीरा धारण किया जाये तो विवाह के बाद प्रबल भाग्योदय होता है.

तुला लग्न
तुला लग्न के व्यक्तियों को लग्नेश शुक्र का रत्न हीरा या उसका उपरत्न जरकिन या ओपल धारण करने से स्वास्थ्य उत्तम रहता है. जीवन में धन-समृद्वि बनी रहती है. इसके प्रभाव से व्यक्ति दूसरों का प्रिय बनकर अल्प परिश्रम से ही सफलता प्राप्त कर लेता है. तुला लग्न के व्यक्तियों को प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता, प्रेमीजन का सहयोग और संतान सुख प्राप्त करने के लिए शनि रत्न नीलम धारण करना चाहिए. भाग्योदय के लिए बुध रत्न पन्ना धारण करना चाहिए. युवावस्था में भाग्योदय के लिए पन्ना बहुत महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है. उच्च शिक्षा में सफलता के लिए भी पन्ना सहयोगी सिद्व होता है.

वृश्चिक लग्न
लग्न स्वामी मंगल का रत्न मूंगा धारण करने से जातक स्वाभिमान के साथ जीवन व्यतीत करने में सफल होता है. स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियों से बचाव व शत्रुबाधा निवारण के लिए इन्हें मूंगा धारण करना शुभ सिद्व होता है. वृश्चिक लग्न में पांचवें घर में मीन राशि होने के कारण गुरु रत्न पुखराज धारण करना भी इनके लिए लाभदायक होता है. पुत्र सुख, प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता तथा प्रेम प्रसंग में अनुकूल स्थितियों के लिए पुखराज धारण करना चाहिए. भाग्य भाव में कर्क राशि होने के कारण भाग्योदय के लिए चन्द्र रत्न मोती धारण करना चाहिए. यदि ऐसा जातक बचपन में ही गले में मोती धारण कर ले तो उसका भाग्य बचपन से ही जाग्रत हो जाता है.

धनु लग्न
लग्नेश गुरु के रत्न धारण करने से इन्हें जीवन में सभी क्षेत्रों में सफलता व प्रसन्नता प्राप्त होती है. व्यक्तित्व प्रभावशाली बनता है. शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता की वृद्वि होती है. पारिवारिक जीवन सुखमय बन जाता है. जीवन में सात्विक विचारों और स्थितियों का निर्माण होता है. पंचमेश मंगल होने के कारण मूंगा रत्न धारण करना किसी प्रतिष्ठित एवं शक्तिशाली व्यक्ति की कृपा दिलाने में सहायक होता है. पुत्र सुख, परीक्षाओं में सफलता के लिए भी मूंगा शुभ प्रभाव देता है. भाग्य स्थान में सिंह राशि होने के कारण सूर्य भाग्य का मालिक बन जाता है. अत: माणिक्य धारण करना इनके लिए भाग्योदयकारी सिद्व होता है. माणिक्य धारण करने से युवावस्था में ही इनका भाग्योदय हो जाता है और इन्हें प्रसिद्वि प्राप्त होती है.

मकर लग्न
मकर लग्न के व्यक्तियों को उत्तम स्वास्थ्य के लिए तथा जीवन में संघर्ष को दूर करके स्थिरता लाने के लिए नीलम धारण करना चाहिए. इससे जीवन का उत्तरार्द्व भी सुखमय व्यतीत होता है. पांचवे घर में वृष राशि होने के कारण शुक्र का रत्न हीरा या उसका उपरत्न जरकिन या ओपल धारण करना चाहिए. प्रेम प्रसंग में सफलता, संतान पक्ष से सुख के लिए यह बहुत प्रभावी होता है. मकर लग्न के व्यक्तियों को भाग्योदय करने के लिए पन्ना धारण करना चाहिए. पन्ना धारण करने से इनका भाग्योदय युवावस्था में ही हो जाता है और यह अपने जीवन में अवसरों का लाभ उठाते हुए अप्रत्याशित उन्नति करते हैं.

कुंभ लग्न
स्वास्थ्य लाभ, जीवन में समस्त प्रकार के सुखों की प्राप्ति और अवरोधों को दूर करने के लिए शनि रत्न नीलम धारण करना चाहिए. वृद्वावस्था में इसके प्रभाव से कोई परेशानी नहीं रहती. पांचवें घर में मिथुन राशि होने के कारण बुध रत्न पन्ना धारण करना भी शुभ फलदायक होता है. इसके प्रभाव से प्रेम प्रसंग में सफलता, प्रतियोगी परीक्षाओं में उच्च सफलता तथा संतान पक्ष से प्रसन्नता मिलती है. कुंभ लग्न के व्यक्तियों के लिए हीरा भाग्योदयकारी होता है. इसके प्रभाव से जातक भाग्यवश धन समृद्वि से परिपूर्ण रहता है.

मीन लग्न
मीन लग्न के व्यक्तियों को गुरु रत्न पुखराज धारण करना बहुत शुभ फलदायक होता है. उत्तम स्वास्थ्य, आजीविका में सफलता तथा जीवन में सुख शांति के लिए भी पुखराज धारण करना उत्तम है. मीन लग्न में पांचवे घर में कर्क राशि होने के कारण चन्द्र रत्न मोती भी इनके लिए बहुत शुभ सिद्व होता है. प्रेम प्रसंग में सफलता, संतान सुख और भावनात्मक सुख के लिए मोती अवश्य धारण करना चाहिए. मीन लग्न के व्यक्तियों के लिए मूंगा भाग्योदयकारी रत्न होता है. मूंगा धारण करने से इनका आत्मविश्वास तो प्रबल होता ही है. इन्हें जीवन में अन्य व्यक्तियों का सहयोग भी सरलता से प्राप्त हो जाता है.
सामान्यत: किसी भी कुंडली में लग्नेश, पंचमेश और भाग्येश ग्रहों के प्रतिनिधि रत्नों को धारण करने का परामर्श दिया जाता है. यदि इन ग्रहों में से कोई भी लाभ स्थान में बैठा हो तो उसका रत्न धारण करना निसंदेह ही शुभ सिद्व होता है. उससे जातक की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
किसी भी ग्रह से सम्बंधित रत्न पहना जाये तो उसके पहनने के मुहूर्त और विधिविधान का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए अन्यथा रत्न अंगूठी आभूषण बन जाती है. ग्रह शांति पर उसका कोई प्रभाव नहीं होता.

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