लाल किताब

क्या है ? लाल किताब

अनूठे उपायों और छोटे-छोटे सरल प्रयोगों के द्वारा जीवन में अनुकूलता प्राप्त करने की विधियों के प्रस्तुतिकरण के कारण लाल किताब बहुत ही तेजी से जन सामान्य के मध्य लोकप्रिय हुयी है. ग्रह शांति के लिए और किसी भी प्रकार की पीड़ा निवारण के लिए इसके उपाय शीघ्र प्रभावशाली एवं सुलभ होते हैं. इस कारण ज्योतिषियों ने इसे तेजी से अपनाया है. ज्योतिष में रूचि रखने वाला एक सामान्य व्यक्ति ‘लाल किताब’ के नाम से परिचित जरुर है. परन्तु केवल लाल किताब के सूत्रों को अपनाते हुए ज्योतिष कार्य करने वाला कोई व्यक्ति प्रकाश में नहीं आया है. एक सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है कि लाल किताब क्या है ? आज बाजार में हिंदी भाषा में लगभग 15 पुस्तकें ‘लाल किताब’ के नाम से बिक रहीं हैं. इनकी कीमत 100 रुपये से लेकर 1000 रूपये से भी ज्यादा है. लाल रंग के आवरण वाली यह पुस्तकें लाल किताब के बारे में आधी-अधूरी जानकारी देती है. पुरानी लाल किताब जिन लेखकों के हाथ लग गयी वे उसके सूत्रों और सिद्वान्तों की अपनी-अपनी व्याख्या कर रहे हैं. अनेक लाल किताब में लेखक का नाम ही नहीं है. लाल किताब की फोटो स्टेट प्रतियां भी खूब महंगी बिकी हैं. लाल किताब के मूल संस्करण की फोटो प्रति कहकर 500 से 1000 रूपये तक उन्हें बेचा गया. लाल किताब के बारे में अनेक रोचक तथ्य प्रचलित हैं. लाल किताब में लय बनाती पंक्तियों में उर्दू एवं अरबी शब्दों का खूब उपयोग किया गया. इस कारण लाल किताब को अरबी क्षेत्र की पुस्तक माना जाता है. ज्योतिष के अध्ययन काल में मेरी भी यही मान्यता थी इसी से प्रेरित होकर जब दुबई में रहने वाले अपने एक परिचित ने इस बारे में अधिक जानकारी मांगी तो उन्होंने बताया कि वहां लाल किताब नाम की कोई पुस्तक नहीं है. साथ ही वहां पर किसी भी प्रकार के ज्योतिष सम्बन्धी साहित्य की बिक्री या ज्योतिष कार्य करने पर पूरी तरह रोक है. कोई भी व्यक्ति विज्ञापन करके ज्योतिष कार्य करे तो वहां के सुल्तान शासक उसे सलाखों के पीछे भेज देंगे. इससे यह तो स्पष्ट है कि अरब देशों में लाल किताब की उत्पत्ति नहीं हुई है. वास्तव में लाल किताब भारतीय मूल की ही विद्या है. लाल किताब कि विषय वस्तु का विवेचन करें तो लाल किताब ज्योतिष के फलादेश, उपायों तथा हस्तरेखा शास्त्र की पुस्तक मानी जा सकती है. लाल किताब में ग्रह स्थिति के प्रभाव अजूबे ढंग से तुकबंदी करती पंक्तियों में बताये गए हैं. जिनकी व्याख्या करके उन्हें समझना पड़ता है. अलग-अलग लेखकों ने अपने बुद्वि विवेक के अनुसार लाल किताब को समझा और उसकी व्याख्या करने का प्रयास किया है. लाल किताब की फलादेश पद्वति भी भिन्न प्रकार की है. गहन अध्ययन और मनन के द्वारा लाल किताब का अध्ययन किया जाये तो ऐसे अनेक सूत्रों का ज्ञान हो सकता है जो अभी तक सर्वथा अज्ञात थे. इसके लिए लाल किताब पर गहन अनुसंधान और उसके सूत्रों के व्यवहारिक प्रतिफल पर शोध करने की जरूरत है. इससे लाल किताब के बारे में अनेक चौंकाने वाली जानकारियां मिलेगी और फलित ज्योतिष में अनेक नए सिद्वान्तों का सूत्रपात होगा.
वर्तमान समय में पाकेट बुक्स की लाल किताब को छोड़कर मूल लाल किताब की बात करें तो अनेक रोचक बातें प्रचलित हैं. सबसे पहली लाल किताब 1939 में प्रकाशित हुई थी. उसके बाद एक-एक साल के अंतर में 1940, 41 एवं 42 में भी लाल किताब के संस्करण प्रकाशित हुए. इनमे पेजों की संख्या में बहुत अंतर था. लाल किताब की इन पुस्तकों में लेखक का नाम गायब है. एक पुरानी लाल किताब पर केवल प्रकाशक गिरधारी लाल शर्मा लिखा है. लेखक का नाम अज्ञात है. कुछ विद्वान पंजाब के पं. रूपचंद जोशी को लाल किताब का लेखक मानते हैं तथा लाल किताब के बारे में अनेक रोचक दन्त कथाएं भी चर्चित रहीं, लेकिन उनकी ठोस वास्तविकता क्या है? किसी ने भी सुबूत और तर्क के साथ प्रमाणित नहीं किया है.
लाल किताब के बारे में अनेक भ्रांतियां भी प्रचलित हैं. कुछ लोग इसे दैवीय पुस्तक मानते हैं. लाल किताब का निर्माण किसी भविष्यवाणी के आधार पर हुआ है. ऐसा भ्रम भी चर्चित है. वास्तव में लाल किताब मनुष्यकृत ही है. लाल किताब का प्रचलन पंजाब एवं कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में पुराने समय में रहा है. मूल रूप से लाल किताब के सिद्वान्तों को किसने लिखा है? इसका विवरण कहीं भी पढ़ने सुनने को नहीं मिलता है. लाल किताब का वर्तमान स्वरूप बहुत बिखरा हुआ है. इसमें विषय वस्तु के प्रस्तुतिकरण में सामंजस्य नहीं है. लाल किताब के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य :-
1. लाल किताब के जितने भी संस्करण अभी तक प्रकाशित हुए हैं. उनमें लाल किताब के मूल लेखक का कहीं जिक्र नहीं मिलता. लाल किताब के सिद्वान्तों को स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व एक अंग्रेज अफसर के कहने पर एक सैनिक द्वारा अपनी जानकारी एवं उसके पास उपलब्ध प्राचीन स्त्रोतों के आधार पर संकलित किया गया जिसे पंजाब के फरवाला गांव के निवासी पं. रूपचन्द्र जोशी ने अपनी बुद्वि विवेक के आधार पर सम्पादित और संकलित किया. लाल किताब के वास्तविक लेखक के बारे में इससे अधिक जानकारी नहीं मिलती है. न ही यह ज्ञात हो पाता है कि लाल किताब का निर्माण कितने समय पूर्व हुआ था. लाल किताब का अभी तक उपलब्ध प्राचीन संस्करण 1941 में छपा था. उससे पूर्व लाल किताब के सिद्वांत इस प्रकार प्रचलित एवं प्रचारित हुए. यह जानकारी भी नहीं मिल सकी है. अनेक वयोवृद्व ज्योतिर्विदों से लाल किताब के सन्दर्भ में चर्चा करने पर उन्होंने इसके सन्दर्भ में किसी प्रकार की जानकारी देने में अनभिज्ञता जाहिर की और लाल किताब के सूत्रों का भी उन्हें कोई ज्ञान नहीं था. इस प्रकार लाल किताब पूर्णत: रहस्मय बनी हुई है. इस बात से यह अवश्य स्पष्ट हो जाता है कि लाल किताब का व्यापक प्रचलन नहीं रहा है. विशेषकर उत्तर भारत के मैदानी प्रदेशों में यह प्रचलित नहीं रही है.
2. लाल किताब नाम किस प्रेरणा के आधार पर, क्यों रखा गया इसका भी कोई तार्किक उत्तर नहीं मिलता है. लाल किताब के नाम से जो पुस्तकें प्राप्त होती हैं. उनकी जिल्द एवं आवरण पृष्ट अवश्य ही लाल रंग की होती है.
3. लाल किताब कोई टोने-टोटके की पुस्तक नहीं है अपितु लाल किताब में ग्रह स्थिति के अनुरूप किसी भी व्यक्ति के जीवन में अनुकूलता, सफलता एवं परेशानियों से मुक्ति के उपाय सुझाये गए हैं. लाल किताब के द्वारा जीवन में महत्वपूर्ण घटनाओं का समय भी निर्धारित किया जा सकता है.
4. लाल किताब में बताये गए प्रयोग अति सरल होते हैं. जिन्हें कि लोग बहुत प्रभावी मानते हैं. पारम्परिक भारतीय ज्योतिष से तुलना करने पर इसके उपाय बिलकुल अनूठे और निराले मालूम होते हैं.
5. लाल किताब में घटनाओं के निर्धारण के लिए वर्षफल को प्रधानता दी जाती है. लाल किताब द्वारा बनाया गया वर्षफल गणित और फलित पद्वति में पारम्परिक ज्योतिषीय पद्वति से बनाये गए वर्षफल से बिल्कुल ही भिन्न होता है.
6. लाल किताब में दशाओं की प्रणाली भी है, जो कि व्यक्ति को ग्रह की स्थिति के अनुसार शुभ या अशुभ प्रभाव द्वारा प्रभावित करती है. यह विंशोत्तरी दशा पद्वति से बिलकुल भिन्न है.
7. लाल किताब में विषय – वस्तु बिल्कुल ही बिखरी हुई, असामंजस्य पूर्ण है. किसी एक अध्याय से सम्बंधित जानकारी का कुछ भाग अन्य अध्यायों में भी मिल सकता है. कही-कहीं पर विषय को एकाएक ही अधूरा छोड़कर किसी नई बात की चर्चा प्रारम्भ हो गई है. इससे ज्योतिष के विद्यार्थियों को लाल किताब को पढ़कर स्वयं ही समझने में कठिनाई सामने आती है.
8. जो व्यक्ति भारतीय ज्योतिष में प्रवीण हों वे ही लाल किताब का अध्ययन मनन करके लाल किताब के सूत्रों का प्रयोग सफलता पूर्वक कर सकते हैं. लाल किताब को समझने के लिए लाल किताब में जगह-जगह बहुतायत में प्रयोग किये गए अजूबे शब्दों के अर्थ समझना आवश्यक है.
9. लाल किताब में किसी भी प्रकार के मन्त्र जप का सुझाव किसी भी उपाय के लिए नहीं बताया गया है.
10. लाल किताब में ग्रह का फल और उपाय लयबद्व पंक्तियों जिन्हें कविता भी कह सकते हैं, के रूप में मिलते हैं. जिसमें कि अनेक भाषाओं के शब्द सम्मिलित हैं.

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