वास्तु में रंग

वास्तु शास्त्र में रंग
-श्रीमती राखी चतुर्वेदी

1. फर्श बनवाते समय काले रंग के पत्थर का ज्यादा प्रयोग नहीं करना चाहिए. काले फर्श से राहु के प्रभाव प्रभाव की वृद्वि होती है जिससे जीवन में चिंता के अवसर बढ़ेंगे.
2. दीवारों तथा फर्श पर सफ़ेद रंग का भी बहुत प्रयोग नहीं करना चाहिए. ऐसा करने से गृहस्थ जीवन बहुत अधिक महत्वाकांक्षी हो जायेगा, जो भविष्य में विलासिता तथा भोग के कारण गृहस्थ सुख की हानि करेगा. यदि शुक्र उच्च व बली हो तो सफ़ेद रंग सही रहता है. शुक्र निर्बल होने पर सफ़ेद रंग का प्रयोग अशुभ होता है.
3. यदि शुक्र उच्च, बली व केंद्र या त्रिकोण में हो या मित्रक्षेत्री हो तो भवन की साज-सज्जा में निर्मलता व पीले व शुभ रंग का प्रयोग करना चाहिए.
4. ड्रेसिंग रूम में सफ़ेद ब्राउन, गुलाबी व क्रीम रंग का इस्तेमाल करना अच्छा रहता है.
5. मास्टर बेडरूम आसमानी गुलाबी व हल्का हरा होना चाहिए. अन्य शयनकक्षों में हरा, सफ़ेद व नीले रंग का प्रयोग ठीक रहता है.
6. ड्राइंग रूम की रंग संयोजना गुलाबी, आसमानी व हल्के रंग की होनी चाहिए.
7. रसोईघर में हमेशा सफ़ेद रंग का अधिक से अधिक प्रयोग होना चाहिए.
8. अध्ययन कक्ष में गुलाबी, आसमानी व हल्के रंग का प्रयोग होना चाहिए. सौम्य रंग मन को विचलित नहीं होने देते.
9. टायलेट में सफ़ेद या गुलाबी रंग का प्रयोग करना चाहिए.
10. चार्टर्ड एकाउणटेंट के कार्यालय की दीवारें सफ़ेद व हल्की पीली होनी चाहिए.
11. शेयर ब्रोकर के कार्यालय का रंग सफ़ेद व नीला होना चाहिए.
12. कंप्यूटर काले के अतिरिक्त किसी अन्य रंग का होना चाहिए.
13. वास्तुशास्त्री के कार्यालय का रंग नीला व हरा होना चाहिए.
14. व्यापारिक संस्थान हरे व पीले रंग के होने चाहिए.

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