शयनकक्ष

वास्तु शास्त्र के अनुसार कैसा हो मास्टर बेडरूम
शयन मनुष्य की एक अति आवश्यक क्रिया है. शयन मनुष्य को सुकून एवं ताजगी प्रदान करता है यदि मनुष्य ठीक प्रकार से नहीं सो पाता तो उसे अनेक प्रकार के रोग घेर लेते हैं और वह कार्य करने में अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पाता है. गृहस्वामी का शयनकक्ष दक्षिण-पश्चिम कोण में अथवा पश्चिम दिशा में होना चाहिए. घर के प्रधान सदस्य या प्रधानकर्ता के सोने के कमरे को मास्टर बेडरूम कहते है. इसका आकार, सज-सज्जा, स्थान कहाँ और कैसा हो, आगे दिया जा रहा है -
1. भवन के साउथ वेस्ट के कमरों को मास्टर बेडरूम कहते हैं. घर का प्रधानकर्ता टॉप फ्लोर के साउथ वेस्ट में रहेंगे. मास्टर बेडरूम का आकार आयताकार होना चाहिए. अटैच बाथरूम के नार्थ वेस्ट में होना चाहिए.
2. बेडरूम दो दिशाओं में खुला होना चाहिए, मुख्य द्वार नार्थ ईस्ट में होना चाहिए. रूम के साउथ वेस्ट के कोने में कोई विंडो नहीं होनी चाहिए. मास्टर बैडरूम के साउथ वेस्ट में लाकर/तिजोरी होनी चाहिए. तिजोरी लकड़ी के पाये पर होनी चाहिए. तिजोरी का मुँह पूर्व या उत्तर में होना चाहिए.
3. बैड साउथ साइड की वाल पर लगा होना चाहिए. बैड का ज्यादा हिस्सा साउथ वेस्ट की तरफ होना चाहिए.सोते समय सिर साउथ में व पैर नॉर्थ में होने चाहिए. बैडरूम की सीलिंग में यदि कोई बीम आ रहा हो तो एक समान सीलिंग बना लेनी चाहिए जो देखने में आँखों को सुन्दर लगे.
4. मास्टर बैडरूम को पूरा फर्नीचर से नहीं भर देना चाहिए. बहुत ही हल्का फर्नीचर जो कम स्थान घेरे, ज्यादा खाली रहे ऐसा बनाना चाहिए. फर्नीचर में गोलाई का आकार काम में नहीं लेना चाहिए. अगर सुन्दरता के लिए काम में ले तो इसका उपयोग कम से कम करे. बैड के सामने ड्रेसिंग टेबल व टी.वी. नहीं होनी चाहिए. ड्रेसिंग टेबल रहने से रूम में कोई तीसरे आदमी की उपस्थिति का आभास होता है. ऊर्जा की कमी व नींद में विघ्न आता है.
5. आफिस का बेग व फाइलें शयन कक्ष में न रखें. रूम का वातावरण आफिस की तरह तनावपूर्ण हो जाता है. निद्रा में विघ्न पैदा करता है. रूम में किसी भी देवी-देवता, भगवान का चित्र न लगायें. पलंग के सामने अपने संयुक्त परिवार का चित्र लगा सकते है. पलंग का गद्दा सिंगल लगायें.
6. शयन कक्ष में कभी झाड़ू नहीं रखनी चाहिए. शयन कक्ष में तेल का कनस्तर, इमामदस्ता, अंगीठी आदि नहीं रखने चाहिए इनके कारन बुरे स्वप्न, व्यर्थ की चिंता, कलह व रोग आदि होते हैं. शयन कक्ष में बैठकर नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए. इनसे स्वास्थ्य, व्यापार, धन आदि पर बुरा प्रभाव पड़ता है. हमेशा किसी न किसी बात की कमी लगी ही रहती है.
7. शयन कक्ष में रंग का चयन अपनी राशि, लग्न और द्वादश भाव में जो भी बलवान ग्रह हो उसके अनुसार करें तो प्राय: शुभ होगा परन्तु एकदम काला या लाल रंग न हो तो शुभ होता है. शयन कक्ष में पूर्वजों की तस्वीरें नहीं होनी चाहिए. यहाँ केवल सौम्य प्रतिमा या कृत्रिम फूल पत्तियों का होना सुखद एवं शांतिपूर्ण निद्रा का परिचायक है.
शयन कक्ष के निर्माण के सम्बन्ध में यदि हम उपरोक्त वर्णित वास्तु शास्त्र के नियमों का पालन करें तो निश्चित ही हमारे जीवन में सुख और शांति का सुखद वातावरण बना रहेगा.

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