चतुर्थ भाव में शनि बनाता है असफल

Written by sdmadan. Posted in ज्योतिष

शनि ग्रह की चतुर्थ भाव में स्थिति को  शुभ नहीं माना जाता. इसके कारण  से जातक का भाग्य बाधित होता है. यहाँ बैठा शनि उन्नति में रुकावट करता है. यह जातक को सुखी नहीं रहने देता. इसे जातक को फेफड़ों और श्वास से सम्बंधित रोग होते हैं. यह व्यक्ति को असफल बना देता है. कुंडली का जो भाव कमजोर हो या पाप ग्रहों के प्रभाव से पिधित हो उससे sambandhit  चीजों के कारण से बहुत परेशान करता है. ऐसा जातक ऐसे स्थान पर रहे जहाँ पर सूर्य का प्रकाश खूब आता हो तो शनि का अशुभ फल कम हो सकता है.

राहु Rahu

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राहु

नीलाम्बरो नीलवपु: किरीटी करालवक्त्र: करवालशूली। चतुर्भुजश्चक्रधरश्च राहु: सिंहाधिरूढो वरदोऽस्तु मह्यम॥

राहु और केतु की प्रतिष्ठा अन्य ग्रहों की भांति ही है। यद्यपि यह सूर्य चन्द्र मंगल आदि की भांति कोई धरातल वाला ग्रह नही है,इसलिये राहु और केतु को छाया ग्रह कहा जाता है,राहु के सम्बन्ध में अनेक पौराणिक आख्यान है,शनि की भांति राहु से भी लोग भयभीत रहते है,दक्षिण भारत में तो लोग राहु काल में कोई कार्य भी नही करते हैं।
राहु के सम्बन्ध में समुद्र मंथन वाली कथा से प्राय: सभी परिचित है,एक पौराणिक आख्यान के अनुसार दैत्यराज हिरण्य कशिपु की पुत्री सिंहिका का पुत्र था,उसके पिता का नाम विप्रचित था। विप्रचित के सहसवास से सिंहिका ने सौ पुत्रों को जन्म दिया उनमें सबसे बडा पुत्र राहु था।

देवासुर संग्राम में राहु भी भाग लिया तो वह भी उसमें सम्मिलित हुआ। समुद्र मंथन के फ़लस्वरूप प्राप्त चौदह रत्नों में अमृत भी था,जब विष्णु सुन्दरी का रूप धारण कर देवताओं को अमृत पान करा रहे थे,तब राहु उनका वास्तविक परिचय और वास्तविक हेतु जान गया। वह तत्काल माया से रूप धारण कर एक पात्र ले आया,और अन्य देवतागणों के बीच जा बैठा,सुन्दरी का रूप धरे विष्णु ने उसे अमृत पान करवा दिया,तभी सूर्य और चन्द्र ने उसकी वास्तविकता प्रकट कर दी,विष्णु ने अपने चक्र से राहु का सिर काट दिया,अमृत पान करने के कारण राहु का सिर अमर हो गया,उसका शरीर कांपता हुआ गौतमी नदी के तट पर गिरा,अमृतपान करने के कारण राहु का धड भी अमरत्व पा चुका था।

इस तथ्य से देवता भयभीत हो गये,और शंकरजी से उसके विनास की प्रार्थना की,शिवजी ने राहु के संहार के लिये अपनी श्रेष्ठ चंडिका को मातृकाओं के साथ भेजा,सिर देवताओं ने अपने पास रोके रखा,लेकिन बिना सिर की देह भी मातृकाओं के साथ युद्ध करती रही।

अपनी देह को परास्त होता न देख राहु का विवेक जागृत हुआ,और उसने देवताओं को परामर्श दिया कि इस अविजित देह के नाश लिये उसे पहले आप फ़ाड दें,ताकि उसका व्ह उत्तम रस निवृत हो जाये,इसके उपरांत शरीर क्षण मात्र में भस्म हो जायेगा,राहु के परामर्श से देवता प्रसन्न हो गये,उन्होने उसका अभिषेक किया,और ग्रहों के मध्य एक ग्रह बन जाने का ग्रहत्व प्रदान किया,बाद में देवताओं द्वारा राहु के शरीर की विनास की युक्ति जान लेने पर देवी ने उसका शरीर फ़ाड दिया,और अम्रुत रस को निकालकर उसका पान कर लिया।

ग्रहत्व प्राप्त कर लेने के बाद भी राहु सूर्य और चन्द्र को अपनी वास्तविकता के उद्घाटन के लिये क्षमा नही कर पाया,और पूर्णिमा और अमावस्या के समय चन्द्र और सूर्य के ग्रसने का प्रयत्न करने लगा।

राहु के एक पुत्र मेघदास का भी उल्लेख मिलता है,उसने अपने पिता के बैर का बदला चुकाने के लिये घोर तप किया,पुराणो में राहु के सम्बन्ध में अनेक आख्यान भी प्राप्त होते है।

खगोलीय विज्ञान में राहु

राहु और केतु आकाशीय पिण्ड नही है,वरन राहु चन्द्रमा और कांतिवृत का उत्तरी कटाव बिन्दु है। उसे नार्थ नोड के नाम से जाना जाता है। वैसे तो प्रत्येक ग्रह का प्रकास को प्राप्त करने वाला हिस्सा राहु का क्षेत्र है,और उस ग्रह पर आते हुये प्रकाश के दूसरी तरफ़ दिखाई देने वाली छाया केतु का क्षेत्र कहलाता है। यथा ब्रहमाण्डे तथा पिण्डे के अनुसार संसार की प्रत्येक वस्तु के साथ राहु केतु आन्तरिक रूप से जुडे हुये है।कारण जो दिखाई देता है,वह राहु है और जो अन्धेरे में है वह केतु है।

Navarn Yantra

Navarn Yantra

स्वप्न फल

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स्वप्न में फल – फूल और शाखाओं से भरे वृक्ष को देखना शुभ होता है. ये स्वप्न व्यक्ति कि सफलता का सूचक होता है.
स्वप्न में घी , तेल और दूध का दर्शन शुभकारी होता है, भोजन नहीं. विशेष रूप से दूध का दर्शन शुभ माना गया है.
स्वप्न में जो खुद को रथ पर बैठकर पूर्व या उत्तर दिशा में जाता हुआ देखता है , उसे धन कि प्राप्ति होती है.
स्वप्न में सुन्दर कन्या को देखने से सुन्दर पत्नी मिलाने का सूचक है. अविवाहित लड़का ऐसा स्वप्न देखे तो यह फल होता है.
स्वप्न में सफ़ेद चीजों को देखना शुभ होता है.
जो स्वप्न में सांप, बिच्छु आदि कीड़ों द्वारा खुद को कटाने पर स्वप्न में भयभीत और दुखी नहीं होता उसे जल्दी ही धन का लाभ होता है.
विवाह योग्य लड़का स्वयं को लड़की होना देखे और विवाह योग्य लड़की स्वयं को पुरुष होना देखे तो वे जल्दी ही विवाह के बंधन में बंध जाते हैं.

मूंछों से चरित्र का ज्ञान

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मूंछों से चरित्र का ज्ञान
पुरुषों के व्यक्तित्व में दाड़ी मूंछों का बहुत प्रभाव माना जाता है.  सामान्यतः मूंछों को पुरुषत्व का प्रतीक माना जाता है. दाड़ी रखने वाले व्यक्ति की संकल्प शक्ति प्रबल होती है.दाड़ी एवं मूछें किस प्रकार की हैं इसके आधार पर भी व्यक्तित्व का आकलन  किया जा सकता है. अंग लक्षण विज्ञान में दाड़ी – मूंछों को चरित्र परखने में महत्वपूर्ण माना जाता  है. प्रस्तुत लेख में दाड़ी – मूंछों की आकृति के अनुसार  व्यक्तित्वा के बारे में बताया जा रहा है -
भरी हुई मोटे सिरों वाली मूछें 
यदि मूछें भरी – भरी और सामानांतर सिरों की हो तो व्यक्ति एक अच्छे सुसंस्कृत परिवार का सदस्य होगा.  जीवन की सम्सयायों और मार्ग में आने वाली कठिनाइयों को दूरदर्शितापूर्वक सुलझा लेगा. साथ ही अपने आश्रित व्यक्तियों की सुख – सुविधाओं में भी किसी प्रकार की कमी नहीं आने देगा. अपन उत्तरदायित्व का भली प्रकार निर्वाह करेगा. तुच्छ और दुष्ट व्यक्तियों की संगति उसे कभी स्वीकार्य नहीं होगी. अपने परिवार के सदस्यों और मित्रों का सदा सही मार्गदर्शन करता है. उसका जीवन बहुधा बहुत व्यस्त रहता है. फिर भी वह अपने मनोरंजन के लिए समय निकाल ही लेता है.
छोटी और सीधी मूछें
जिस मनुष्य की मूछें छोटी, सीधी और दांतों को साफ करने वाले ब्रुश के समान होती हैं उसकी यह हार्दिक अभिलाषा होती है की लोगों का ध्यान उसकी ओर आकर्षित हो. अपनी इस इच्छा की पूर्ति के लिए वह जानबूझकर इसे कार्य करता है कि वह बरबस ही लोगों कि नजर में आ जाये. यदि वह कभी राजनैतिक या सामाजिक क्षेत्र में प्रवेश करता है तो उसका मुख्य उद्देश्य देश , जनता या समाज कि सेवा करना नहीं होता है. इसकिये वह नीरस ओर एकाकी कार्यों में योगदान देने कि अपेक्षा समारोहों ओर उत्सवों में भाग लेना अधिक श्रेयष्कर  ओर लाभदायक समझता है. इसका कारन यह है कि उसे ऐसे समारोहों में  अपने विनोद पूर्ण वार्तालाप से लोगों को प्रभावित करने के अधिक अवसर उपलब्ध होते हैं. जहाँ एक ओर उसके घनिष्ठ मित्र उसके इस रूप कि प्रसंशा करते है तथा उसे सभा - सोसायटी  की रौनक समझते हैं वहां दूसरी ओर उसके परिचितों में ऐसे लोग भी होते हैं जो उसे दिमाग चटाने वाला कहकर उसकी संगति से कतराते हैं.
अत्यंत पतली मूछें -
कुछ लोग पेंसिल की लकीर के समान अत्यंत पतली मूछें रखतें हैं. एसा व्यक्ति द्रढ़ निश्चयी होता है. वह जिस कार्य को करने का विचार मन में ठान लेता hai  उसे पूरा करके रहता है. जितना वह द्रढ़ निश्चयी होता है उतना आत्मबली  नहीं होता . उसके ह्रदय में ऐसी आशंका रहती है की कहीं कोई ऐसी अड़चन न आ जाये की काम बिच में ही अटक जाये. फिर भी वह अपने कार्य में लगन के साथ जुटा रहता है. आत्म विश्वास की कमी के कारण कभी -कभी उसके मन में यह भय भी जाग्रत हो जाता है की मैं जो काम कर रहा हूँ उसमें कोई त्रुटि तो नहीं है.  यदि वह त्रुटि अधिकारी की द्रष्टि में आ गई  तो मुझे डांट खानी पड़ेगी. यह उसका सौभाग्य है की उसको कोई न कोई मित्र या परिजन ऐसा मिल जाता है कि जो उसके टूटते हुए आत्म विश्वास को सहारा देकर उसे यह विश्वास  दिला  देता है कि उसमें कार्य संपन्न करने कि पर्याप्त योग्यता है, इसलिए निर्भय होकर अपना कार्य करता रहे.
झुकी  हुई  मूछें -
जिन लोगों की मुछों के सिरे अधरों की अंतिम रेखा के निचे – हास्य रेखा तक फैले होते हैं वे अपना प्रत्येक कार्य भली – भांति सोच समझकर बड़ी सावधानी से अपनी सम्पूर्ण शक्ति एवं योग्यता का प्रयोग करके करते हैं. इसी लोग केवल विचारों से ही महत्वाकांक्षी नहीं होते अपने परिश्रम और प्रयत्नों से प्रगति के मार्ग पर निरंतर अग्रसर होते होते रहते हैं. जब वे शंकालु होकर जरुरत से ज्यादा सतर्क हो जाते हैं और प्रत्येक कदम फूंक – फूंक कर रखते हैं तो वे अपनी प्रतिभा का पूरा उपयोग नहीं कर पते . जब वे अपनी इस दुर्बलता पर विजय प्राप्त करके पूरी लगन से कार्य में जुट जाते हैं तो सफलता उनके चरण चूमने लगाती है. इसे अवसरों पर वे अस्थाई रूप से लोगों से मिलाना जुलना बंद कर देते हैं.
लम्बी उमेंठी हुई मूंछें -
इसे लोग हंसमुख स्वभाव के और  बुद्धिमान होते हैं. उनकी निरीक्षण शक्ति पैनी और अंतस्तल तक पहुँचने वाली होती है. उन्हें अपनी वाणी और लेखनी पर अच्छा अधिकार होता है. वे थोड़े शब्दों में ही काफी महत्वपूर्ण बात कह जाते हैं. वे साधारण सी बात को भी इसे प्रस्तुत करते है कि श्रोता मंत्र – मुग्ध हो जाते हैं.  

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