Astrologer List

Written by sdmadan. Posted in ज्योतिष

Maharishi Abhay Katyayan , Barha –  bhind (M.P.)

Dr. Banwari lal Pathak , Mathura (U.P.)

Sh. Gopal Raju , Roorki (Ukd.)

Dr. Anjana Joshi , Jaipur (Raj.)

Sh.Himanshu Pratihar, Etah (U.P.)

Dr.D.N.Sharma, Vrindaban (U.P.)

Sh. Ravindra Nath chaturvedi, Mathura (U.P.)

Pt. Ribhudev Sharma, Ajmer (Raj.)

Acharya Dayanand Shastri, Jaipur(Raj.)

Acharya Vagaram Parihar, Banswara (Raj.)

Pt. Mahesh Nand Sharma, Ladanu(Raj.)

Sh. Lakhan Parihar, Mathura(U.P.)

Sh. Shyam Sundar, Mathura(U.P.)

Pt. Tuntun Shstri, Rohtas (Bihar)

Sh. Raghunandan Prasad Gaur, Kota (Raj.)

Pt. Rajesh Sharma, Jallandhar (Pb.)

Pt. Shashi Mohan Bahal, Delhi

Dr. Bhuvaneshwar Prasad Verma Kamal, Muzaffarpur (Bihar)

Pt. Vivek Gaur, Lahar – bhind (M.P.)

Sh. Jitendra Raghuvanshi, Bulandshahar (U.P.)

लिखावट से कर्मचारी चयन

Written by sdmadan. Posted in ज्योतिष

हस्त लिपि के परीक्षण के कितने उपयोग हो सकते हैं इस बारे में बहुत से अनुसन्धान विभिन्न देशों में चल रहे हैं. किसी व्यक्ति की विश्वसनीयता को परखने में उसकी लिखावट का परीक्षण निश्चय ही बहुत उपयोगी होता है. प्रत्येक आदमी अपनी कमजोरियों और अवगुणों को छिपाता  है और गुणों को सामने रखता है. किसी रोजगार के लिए भी आवेदन करने वाले अपने आवेदनों में अपनी योग्यता और क्षमता का बखान करते हैं. और अपनी कमियों को छिपा जाते है. यदि नियोक्ता लिखावट के विश्लेषण का जानकर है तो वह आवेदन पत्रों की लिखावट की जाँच से सही – सही निष्कर्षों पर पहुँच सकता है.  इस सन्दर्भ में निम्न बातों को ध्यान में रखना चाहिए -
स्वास्थ्य – स्वस्थ व्यक्ति की लिखावट का दबाब  एक सा रहता है और उसमें लयात्मकता होती है.
कौशल – चतुर और अपने कम में प्रवीण व्यक्ति की लिखावट कभी बड़े आकर की नहीं होती. वह घुंडीदार अक्षरों , मात्राओं और बिन्दिओं में पूरी गोलाई बनाता है.
खुला दिमाग – खुला दिमाग रखने वाला व्यक्ति दूसरों की सोच की कभी उपेक्षा नहीं करता. वह सबकी बातें ध्यान से सुनता है और अपनी गलती सुधारने के लिए हमेशा तैयार रहता है. इस प्रकार के व्यक्ति की लिखावट भी खुली – खुली होती है. अक्षरों, पंक्तियों और शब्दों के बीच समानुपात दूरी बनाये रखना उसकी लिखावट की विशेषता होती है. 
भरोसेमंद – यदि लिखावट में अक्षर सामान आकर के बनते हैं और पंक्तियाँ सीधी रहती हैं तो उसे लिखने वाला विश्वासघात नहीं करता.
सहकार भावना – यदि लिखावट में अक्षरों का रूप कोणीय हो और प्रारंभिक अक्षर अधिक बड़े न हो तो आप लिखने वाले में सहकार भावना की मौजूदगी  के बारे में निश्चित हो सकते हैं.
संयत स्वभाव -  यदि पूरी लिखावट में दबाब एक  सा बना रहता है और आधार डंडा और मात्राएँ पूरी -पूरी और समुचित आकार की बनती हैं तो लिखने वाला धीर और संयत प्रकृति का व्यक्ति होता है.
कर्मचारी को हटाने का निर्णय  -
यदि आप किसी कंपनी के मालिक हैं तो आपको कभी – कभी कर्मचारी को हटाने का असुखद निर्णय भी लेना पड़ता है. अवांछित कर्मचारियों को हटाने का निर्णय यदि निम्न बातों  के आधार पर लिया जाये तो मालिक अपनी ऊर्जा  और समय की काफी बचत कर सकता है.
सुस्ती – यदि कोई व्यक्ति धीमी गति से गोल गोल अक्षर अपनी लिखावट में बनाता  है तो वह सुस्त और कामचोर होता है.
बेईमान – यदि लिखावट में पंक्तियाँ छोटी – बड़ी बनती हैं और कहीं कम दूरी  पर और कहीं अधिक दूरी  पर होती हैं. लिखावट में अक्षरों का आकार  बदलता रहता है. और पंक्तियाँ लहरदार होती हैं तो लिखने वाले की ईमानदारी पर संदेह किया जा सकता है.
लापरवाह – यदि लिखावट में वाक्य चिन्हों का लापरवाही से प्रयोग किया जाये , अनुस्वार बिन्दुओं को जहाँ जरुरत हो वहां न लगाया जाये, और शब्दों के बीच – बीच में कहीं – कहीं अक्षर भी छूट  जाएँ. तो लिखने वाले को लापरवाह स्वभाव  का व्यक्ति समझा जा सकता है. 
नकारात्मक - लिखावट में शब्दों को भारी  दबाब के साथ सीधा खड़ा या पीछे की और झुककर लिखने वाला , अक्षरों के आखिरी सिरे अपेक्षाकृत मोटे बनाने वाला, और सुस्त चाल  से लिखने वाला नकारात्मक स्वभाव का व्यक्ति होता है.
प्रमोशन किसे दें ? -
प्रत्येक व्यापार  संस्थान  में समय – समय पर कर्मचारियों को प्रोन्नत करने की जरुरत पड़ती रहती है. इसे समय यदि प्रबंधक उनकी लिखावट में निम्न बातों पर ध्यान दे तो उपयुक्त को चुनकर प्रोन्नत किया जा सकता है. अधिशाषी योग्यता रखने वाले व्यक्ति की  लिखावट में दबाब अधिक और समरूप रहता है. वह या तो सीधी लिखाई करता है अथवा आगे की और झुकाव लिए अक्षर बनता है. हस्ताक्षर बहुत तेज गति से करता है.
बेईमान कैसे पकड़ें ? -
यदि आप व्यापारी हैं और आपको अपने किसी कर्मचारी पर बेईमान या विश्वासघाती होने का संदेह है तो उसकी लिखावट पर नजर डालिए. यदि उस व्यक्ति की लिखावट सामान्य की अपेक्षा अधिक अव्यवस्थित है दबाब कहीं कम और कहीं अधिक है अक्षरों के आकार में परिवर्तन आ रहा है तो आपका शक सही है. उस व्यक्ति में बेईमानी और धोखेबाजी की प्रवृत्ति घर करती जा रही है आप उसे हटाने में जल्दीबाजी न करें बल्कि कुछ दिन और परखें सब बातें सामने आ जाएँगी.
लिखावट से उजागर रहस्यों से लाभ -
यदि आप लिखावट का उपयोग करना जानते हैं तो किस प्रकार उसका उपयोग अपने रोजगार – व्यापर को बड़ाने  - चमकाने के लिए कर सकते हैं इसके लिए कुछ सुझाव निम्न प्रकार हैं -
आप किसी भी कंपनी में सेल्स मैन  हैं यदि आप संभावित ग्राहक की लिखावट का अध्ययन करके उसकी पसंद – नापसंद को पहले से ही जान  लेते हैं तो आपकी बिक्री की संभावना बड़  जाएगी. आप बैंकर हैं तो बेईमान और जालसाज लोगो के झांस में आने से बच सकते हैं. यदि आप न्यायधीश हैं तो आप अभियुक्त की लिखावट से जान सकते हैं की उस पर जो आरोप लगाये जा रहे हैं वो कितने ठोस  और सच्चे हैं. गवाह के लिखित बयान से उसकी गवाही की सच्चाई का पता लगा सकते हैं. आप वकील हैं तो मुवक्किल की आदतों और विचारों की जानकारी से लैस हो सकते हैं. यदि आप क्रय अधिकारी हैं तो संभावित विक्रेता की लिखावट से जान सकते हैं की वह अपने माल  के बारे में आपसे जो कह रहा है वह कितना सच है कितना झूठ. यदि आप कार्मिक प्रबंधक हैं तो प्रत्याशियों के हस्त लिखित आवेदनों का अध्ययन करके उचित कर्मचारी का चयन कर सकते हैं. घरेलू  नौकर रखने से पहले आप उसके  स्वभाव , प्रवृत्तियों का पता इस विधि से लगा सकते हैं. राजनीतिज्ञ यदि लिखावट का विश्लेषण जानता  है तो उसको वास्तिविक मित्रों को पहचानने में देर नहीं lagati. किसी विद्यालय का प्राचार्य योग्य और उपयुक्त शिक्षकों की नियुक्ति में, शिक्षा विभाग अवांछनीय शिक्षकों को चुन – चुनकर निकालने में और विद्यालय का पंजीयक अनेक सामान योग्यता वाले  संभावित छात्रों में से किसी एक सर्वाधिक उपयुक्त छात्र के चयन में लिखावट के विश्लेषण ज्ञान की सहायता ले सकता है. कर्ज देने वाली कोई संस्था ऐसे  व्यापारियों को कर्ज देने की समय सीमा तय कर सकती है जिनका हस्तलेख उनमें सट्टेबाजी की प्रवृत्ति को दिखाता  है.

अश्वनी नक्षत्र

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अश्वनी नक्षत्र  

इस नक्षत्र की स्थिति राशि चक्र में मेष राशि में शून्य अंश से तेरह अंश बीस कला तक होती है. इस नक्षत्र के स्वामी देव अश्वनी कुमार हैं जो कि देवों के चिकित्सक हैं. इस नक्षत्र की आकृति घोड़े के सिर के समान है. इस नक्षत्र से प्रभावित व्यक्ति घुड़सवार, सैनिक या दैवीय शक्ति संपन्न चिकित्सक (वैद्य) होता है. चिकित्सा का कारक ग्रह अश्वनी नक्षत्र में बैठता है तो वह व्यक्ति सफल चिकित्सक बनता है. इस नक्षत्र का सम्बन्ध ट्रांसपोर्ट (यातायात) या ट्रांसपोर्ट विभाग से होता है. क्योंकि इस नक्षत्र के देव अश्वी जानवरों को सामान लादकर चलते हुए देखे जाते हैं. पुराणों के अनुसार अश्वनी कुमार(जुड़वां भाई) की माता संग और पिता सूर्य हैं. कहा जाता है कि सूर्य के वीर्य के तेज को इनकी माता संग गर्भ में रोक नहीं सकती थी इसलिए उन्होंने सूर्य देव के शुक्र को अपने नथुनों में रख लिया था. इसका कारण अश्वनी नक्षत्र को जुड़वां उत्पत्ति का कारक भी माना जाता है. यदि कुम्भ लग्न हो और मंगल इस नक्षत्र में बैठा हो तो ये जातक के जुड़वां भाई बहिन होने का संकेत देती है. यदि सूर्य ब्रहस्पति या पिता का कारक ग्रह पितृ भाव (9) का स्वामी या पुत्र भाव का स्वामी ग्रह इसी तरह अश्वनी नक्षत्र में बैठा हो तो ऐसे जातक के पिता,चाचा या संतान जुड़वां होती है.

ग्रह दोष निवारण के उपाय

- घर की पूर्व दिशा में लगे हुए किसी भी वट वृक्ष की जड़ को शुभ मुहूर्त में निकालकर पास रखने से राहु ग्रह की पीड़ा शांत होती है.

- यदि राहु ग्रह के अशुभ प्रभाव को दूर करना हो तो जल में २ वट पत्र को डालकर उस जल से स्नान करना चाहिए. यह राहु के दुष्प्रभाव को मिटाने का सरल और प्रभावी तरीका है.

- चतुर्दशी के दिन वट वृक्ष की जड़ में दूध चढ़ाने से देव बाधा दूर होती है.

- गिरी के गोले में छेद करके उसमें मेवा और शक्कर भर दें तथा उसे जमीन  में दबा दें. इससे केतु ग्रह का प्रभाव शांत होता है.

- महालक्ष्मी पूजन के समय सीताफल को शामिल करने से दरिद्रता योग का नाश होता है. दीपावली पर इसे पूजन में रखना शुभ होता है.

- चन्द्र ग्रह की पीड़ा शांत करने हेतु चमेली के पुष्प से चन्द्र पूजन करना चाहिए.

- शिवजी को नित्य चमेली का फूल अर्पित करने से भूत बाधा दूर होती है.

- जिस व्यक्ति को नजर लगी हो तो उसके ऊपर लोहे की कील ११ बार उतारकर गूलर वृक्ष के तने में ठोंक दें नजर उतर जाती है. दुकान,व्यापार की नजर उतारने के लिए भी यह प्रयोग किया जा सकता है.

- किसी भी प्रकार के प्रमेह को दूर करने के लिए गूलर की लकड़ी का शहद और गन्ने के रस के साथ हवन करना चाहिए. इससे डायबिटीज़ का शमन होता है.

- मेष राशि के सूर्य के समय एक मसूर तथा दो नीम की पत्तियों को खाने से एक साल तक सर्प भय नहीं रहता.

- अनिंद्रा की स्थिति में मेहँदी के फूल सिरहाने रखने चाहिए. नींद आती है.

- बांस जलाकर तापने से बीमारी होती है.

- बिल्ब, देवदारु और प्रियंगु की जड़ों को एक साथ कूटकर चूर्ण बना लें. इस चूर्ण की धूनी देने से भूत प्रेत भाग जाते हैं.

- बांस को घर में जलाने से अशांति आती है.

- भविष्य पुराण के अनुसार जो व्यक्ति पलाश का पुष्प शिवजी पर अर्पित करता है उसे भूत बाधा और पितर दोष नहीं सताते हैं.

- बबूल की जड़ में शनिवार को काले तिल चढ़ाने से राहु की पीड़ा शांत होती है. लगातार २१ शनिवार करें.

- व्याधियों के शमन के लिए पलाश के पत्तों की पत्तल में कुछ दिन निरंतर भोजन करना चाहिए.

- अंडी का बीज फैक्ट्री में होने से श्रमिक प्रशासनिक बाधाएँ आती हैं. घर में अंडी का पेड़ अति अशुभ होता है.

- सत्यानाशी की जड़ पास रखने से राहु पीड़ा शांत होती है.

- भरणी नक्षत्र में निकाली गई ग्वारपाठे की जड़ को अपने पास रखने से अस्त्र शस्त्र का भय नहीं रहता.

- हरसिंगार के पुष्प प्रत्येक पूर्णिमा को बाबड़ी में डालने से चन्द्र पीड़ा दूर होती है.

- नवमी तिथि के दिन आंवले के वृक्ष का पूजन करने से सौभाग्य में वृद्वि होती है. वैधव्य का नाश होता है.

- ३ गुलाब, ३ बेला के पुष्प बाबड़ी में डालने से रुका हुआ कार्य बनता है.

चमत्कारिक उपाय

- वाहन को नजर दोष से बचाने के लिए ४ पीले नींबू चारों पहियों से कुचल कर आगे बढे,वाहन दुर्घटना ग्रस्त नहीं होगा.

- अगर आप क्रोधी होते जा रहे हैं तो भोजन के बाद मीठा अवश्य खाएं.

- पीपल वृक्ष को काटने से संतान हानि होती है.

- पीपल वृक्ष पर दिन में देवताओं, रात्रि में असुरों, ब्रह्ममुहूर्त में धर्मराज, संध्याकाल में शनिदेव का वास होता है. इसलिए आधी रात के समय पीपल के नीचे जाने से मना किया जाता है.

- छठ पूजा एकमात्र पर्व है जिसमें सूर्य उदय के साथ डूबते सूर्य को अर्घ्य  दिया जाता है.इस व्रत को करने से सम्पूर्ण सुख मिलते हैं. पति एवं पुत्र दीर्घायु होते हैं.

- षष्टी, प्रतिपदा और अमावस को दातुन नहीं करना चाहिए.

- षष्टी को तेल लगाना निषिद्व है.

- अष्टमी को मांस खाना निषिद्व है.

- चतुर्दशी को बाल कटवाना, दाढ़ी बनवाना निषिद्व है.

- अमावस को कामक्रीड़ा न करें.

- ज्योतिष वारिधि के अनुसार ग्रह की अंगूठी निम्न धातुओं में बनवानी चाहिए.

सूर्य – तांबा, स्वर्ण, प्लेटिनम.

चन्द्र – चाँदी.

मंगल – रक्तवर्ण तांबा.

बुध – पीतल.

गुरु – स्वर्ण.

शुक्र – कांसा.

शनि – लोहा.

राहु – टिन.

केतु – सीसा.

हमारे पाप और हमारी पीडाएं

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हमारे पाप और हमारी पीडाएं

हम अक्सर लोगों को यह कहते हुए सुनते हैं कि मैंने कभी कोई बुरा काम नहीं किया फिर भी मैं बीमारियों से परेशान हूँ. ऐसा मेरे साथ क्यों हो रहा हैं. क्या भगवान बहुत कठोर और निर्दयी हैं ?

पहली बात तो हमें ये समझ लेनी चाहिए कि हमारे कार्यों और भगवान का कोई सम्बन्ध नहीं है इसलिए हमें अपनी परेशानियों और पीडाओं के लिए ईश्वर को दोषी नहीं मानना चाहिए. यदि आप सह्गुनी हैं तो आप जीवन में संपन्न और सुखी रहते हैं. यदि आप लोगों को सताते हैं या पाप कर्म करते हैं तो आप पीड़ित होते हैं और तरह तरह की बीमारियाँ कष्ट देती हैं. हमारे कार्यों का हम पर निश्चित रूप से असर होता है. कभी हमारे कर्मों का प्रभाव इसी जन्म में तो कभी अगले जन्म में मिलता हैं लेकिन मिलता जरुर है. आशय है कि हम अपने कर्मों के प्रभाव से कभी मुक्त नहीं होते यह बात अलग है कि इसका प्रभाव तुरंत दिखाई न दे .

इस लेख में इस बात का विवरण प्रस्तुत किया जा रहा है कि हमारे पाप हमें किस रूप में लौटकर मिलते हैं और पीड़ित करते हैं. यदि आप किसी रोग से पीड़ित है तो ये समझें कि आपने अवश्य ही कोई पाप पूर्व जन्म में किया है. आपके पाप कर्म द्वारा होने वाली कुछ बीमारियों को साकेंतिक रूप में नीचे दिया जा रहा है.

- लोगों का धन लूटने वाले गले की बीमारी से पीड़ित होते हैं.

- पढ़े लिखे ज्ञानी जन के प्रति दुर्भावना से काम करने वाले व्यक्ति को सिरदर्द की शिकायत रहती है.

- हरे पेड़ काटने वाले और सब्जियों की चोरी करने में लगे व्यक्ति अगले जन्म में शरीर के अन्दर अल्सर (घाव)से पीड़ित होते हैं.

- झूठे और धोखाधड़ी करने वाले लोगों को उल्टी की बीमारी होती है.

- गरीब लोगों का धन चुराने वाले लोगों को कफ और खांसी से कष्ट होता है.

- यदि कोई समाज के श्रेष्ठ पुरुष (विद्वान) की हत्या कर देता है तो उसे तपेदिक रोग होता है.

- गाय का वध करने वाले कुबड़े बनते हैं.

- निर्दोष व्यक्ति का वध करने वाले को कोढ़ होता है.

- जो अपने गुरु का अपमान करता है उसे मिर्गी का रोग होता है.

- वेद और पुराणों का अपमान और निरादर करने वाले व्यक्ति को बार बार पीलिया होता है.

- झूठी गवाही देने वाले व्यक्ति गूंगे हो जाते हैं.

- पुस्तकों और ग्रंथो की चोरी करने वाले व्यक्ति अंधे हो जाते हैं.

- गाय और विद्वानों को लात मरने वाले व्यक्ति अगले जन्म में लगड़े बनते हैं.

- वेदों और उसके अनुयायियों का निरादर करने वाले व्यक्ति को किडनी रोग होता है.

- दूसरों को कटु वचन बोलने वाले अगले जन्म में हृदय रोग से कष्ट पाते हैं.

- जो सांप, घोड़े और गायों का वध करता है वह संतानहीन होता है.

- कपड़े चुराने वालों को चर्म रोग होते हैं.

- परस्त्रीगमन करने वाला अगले जन्म में कुत्ता बनता है.

- जो दान नहीं करता है वह गरीबी में जन्म लेता है.

- आयु में बड़ी स्त्री से सहवास करने से डायबिटीज़ रोग होता है.

- जो अन्य महिलाओं को कामुक नजर से देखता है उसकी आंखें कमजोर होती हैं.

- नमक चुराने वाला व्यक्ति चींटी बनता है.

- जानवरों का शिकार करने वाले बकरे बनते हैं.

- जो ब्राह्मन होकर भी गायत्री मंत्र नहीं पढ़ता वो अगले जन्म में बगुला बनता है.

- जो ज्ञानी और सदाचारी पुरुषों को दिए गए अपने वचन से मुकर जाता है वह अगले जन्म में गीदड़ बनता है.

- जो दुकानदार नकली माल बेचते हैं वे अगले जन्म में उल्लू बनते हैं.

- जो अपनी पत्नी को पसंद नहीं करते वो खच्चर बनते है.

- जो व्यक्ति अपने माता पिता और गुरुजनों का निरादर करता है उसकी गर्भ में ही हत्या हो जाती है.

- मित्र की पत्नी से सम्बन्ध बनाने की इच्छा रखने वाला अगले जन्म में गधा बनता है.

- मदिरा का सेवन करने वाला व्यक्ति भेड़ियाँ बनता है.

- जो स्त्री अपने पति को छोड़कर दूसरे पुरुष के साथ भाग जाती है वह घोड़ी बन जाती है.

पूर्व जन्म में किये गए पापों से उत्त्पन्न रोग कैसे दूर हों ?

पूर्व जन्मार्जितं पापं व्याधि रूपेण व्याधिते,

तछंती: औषधनैधान्ने: जपाहोमा क्रियादिभी:

पूर्व जन्म के जो पाप हमें रोग के रूप में आकर पीड़ित करते हैं उनका निराकरण करने के लिए दवाइयां, दान, मंत्र जप, पूजा, अनुष्ठान करने चाहिए. केवल यह ही नहीं हमें गलत काम करने से भी बचना चाहिए. तभी हम पूर्वजन्म कृत पापों के दुष्प्रभाव से मुक्त हो सकेगें.

जिस प्रकार रोग का निवारण करने से पहले रोग की ठीक ठीक पहचान करना बहुत जरुरी है. रोग की पहचान के बाद ही उसका इलाज किया जाता है उसी प्रकार कुंडली में ग्रह दोषों के आधार पर पूर्व जन्म में किये गए पाप कर्मों को जानकर उनका समाधान कराया जाये तो निश्चय ही रोग पीड़ा से शीघ्रता से मुक्ति होती है. पाठकों को यह जानकर आश्चर्य हो सकता है कि जब मैंने जन्म कुंडली में पूर्व जन्मकृत पापों को जानकर उनका प्राश्यिचत करा दिया तो अनेक ऐसे रोगियों को तत्काल स्वास्थ्य में सुधार आना शुरू हो गया जो लगातार इलाज चलने के बाद भी निरंतर रोगी बने हुए थे. ऐसे व्यक्ति जो बहुत अच्छे चिकित्सक के इलाज के बाद भी रोगी बने हुए हैं वे मुझसे संपर्क करके रोग मुक्त होने के लिए मार्गदर्शन ले सकते हैं. -संपादक

अश्वनी नक्षत्र

इस नक्षत्र की स्थिति राशि चक्र में मेष राशि में शून्य अंश से तेरह अंश बीस कला तक होती है. इस नक्षत्र के स्वामी देव अश्वनी कुमार हैं जो कि देवों के चिकित्सक हैं. इस नक्षत्र की आकृति घोड़े के सिर के समान है. इस नक्षत्र से प्रभावित व्यक्ति घुड़सवार, सैनिक या दैवीय शक्ति संपन्न चिकित्सक (वैद्य) होता है. चिकित्सा का कारक ग्रह अश्वनी नक्षत्र में बैठता है तो वह व्यक्ति सफल चिकित्सक बनता है. इस नक्षत्र का सम्बन्ध ट्रांसपोर्ट (यातायात) या ट्रांसपोर्ट विभाग से होता है. क्योंकि इस नक्षत्र के देव अश्वी जानवरों को सामान लादकर चलते हुए देखे जाते हैं. पुराणों के अनुसार अश्वनी कुमार(जुड़वां भाई) की माता संग और पिता सूर्य हैं. कहा जाता है कि सूर्य के वीर्य के तेज को इनकी माता संग गर्भ में रोक नहीं सकती थी इसलिए उन्होंने सूर्य देव के शुक्र को अपने नथुनों में रख लिया था. इसका कारण अश्वनी नक्षत्र को जुड़वां उत्पत्ति का कारक भी माना जाता है. यदि कुम्भ लग्न हो और मंगल इस नक्षत्र में बैठा हो तो ये जातक के जुड़वां भाई बहिन होने का संकेत देती है. यदि सूर्य ब्रहस्पति या पिता का कारक ग्रह पितृ भाव (9) का स्वामी या पुत्र भाव का स्वामी ग्रह इसी तरह अश्वनी नक्षत्र में बैठा हो तो ऐसे जातक के पिता,चाचा या संतान जुड़वां होती है.

ग्रह दोष निवारण के उपाय

- घर की पूर्व दिशा में लगे हुए किसी भी वट वृक्ष की जड़ को शुभ मुहूर्त में निकालकर पास रखने से राहु ग्रह की पीड़ा शांत होती है.

- यदि राहु ग्रह के अशुभ प्रभाव को दूर करना हो तो जल में २ वट पत्र को डालकर उस जल से स्नान करना चाहिए. यह राहु के दुष्प्रभाव को मिटाने का सरल और प्रभावी तरीका है.

- चतुर्दशी के दिन वट वृक्ष की जड़ में दूध चढ़ाने से देव बाधा दूर होती है.

- गिरी के गोले में छेद करके उसमें मेवा और शक्कर भर दें तथा उसे जमीन  में दबा दें. इससे केतु ग्रह का प्रभाव शांत होता है.

- महालक्ष्मी पूजन के समय सीताफल को शामिल करने से दरिद्रता योग का नाश होता है. दीपावली पर इसे पूजन में रखना शुभ होता है.

- चन्द्र ग्रह की पीड़ा शांत करने हेतु चमेली के पुष्प से चन्द्र पूजन करना चाहिए.

- शिवजी को नित्य चमेली का फूल अर्पित करने से भूत बाधा दूर होती है.

- जिस व्यक्ति को नजर लगी हो तो उसके ऊपर लोहे की कील ११ बार उतारकर गूलर वृक्ष के तने में ठोंक दें नजर उतर जाती है. दुकान,व्यापार की नजर उतारने के लिए भी यह प्रयोग किया जा सकता है.

- किसी भी प्रकार के प्रमेह को दूर करने के लिए गूलर की लकड़ी का शहद और गन्ने के रस के साथ हवन करना चाहिए. इससे डायबिटीज़ का शमन होता है.

- मेष राशि के सूर्य के समय एक मसूर तथा दो नीम की पत्तियों को खाने से एक साल तक सर्प भय नहीं रहता.

- अनिंद्रा की स्थिति में मेहँदी के फूल सिरहाने रखने चाहिए. नींद आती है.

- बांस जलाकर तापने से बीमारी होती है.

- बिल्ब, देवदारु और प्रियंगु की जड़ों को एक साथ कूटकर चूर्ण बना लें. इस चूर्ण की धूनी देने से भूत प्रेत भाग जाते हैं.

- बांस को घर में जलाने से अशांति आती है.

- भविष्य पुराण के अनुसार जो व्यक्ति पलाश का पुष्प शिवजी पर अर्पित करता है उसे भूत बाधा और पितर दोष नहीं सताते हैं.

- बबूल की जड़ में शनिवार को काले तिल चढ़ाने से राहु की पीड़ा शांत होती है. लगातार २१ शनिवार करें.

- व्याधियों के शमन के लिए पलाश के पत्तों की पत्तल में कुछ दिन निरंतर भोजन करना चाहिए.

- अंडी का बीज फैक्ट्री में होने से श्रमिक प्रशासनिक बाधाएँ आती हैं. घर में अंडी का पेड़ अति अशुभ होता है.

- सत्यानाशी की जड़ पास रखने से राहु पीड़ा शांत होती है.

- भरणी नक्षत्र में निकाली गई ग्वारपाठे की जड़ को अपने पास रखने से अस्त्र शस्त्र का भय नहीं रहता.

- हरसिंगार के पुष्प प्रत्येक पूर्णिमा को बाबड़ी में डालने से चन्द्र पीड़ा दूर होती है.

- नवमी तिथि के दिन आंवले के वृक्ष का पूजन करने से सौभाग्य में वृद्वि होती है. वैधव्य का नाश होता है.

- ३ गुलाब, ३ बेला के पुष्प बाबड़ी में डालने से रुका हुआ कार्य बनता है.

चमत्कारिक उपाय

- वाहन को नजर दोष से बचाने के लिए ४ पीले नींबू चारों पहियों से कुचल कर आगे बढे,वाहन दुर्घटना ग्रस्त नहीं होगा.

- अगर आप क्रोधी होते जा रहे हैं तो भोजन के बाद मीठा अवश्य खाएं.

- पीपल वृक्ष को काटने से संतान हानि होती है.

- पीपल वृक्ष पर दिन में देवताओं, रात्रि में असुरों, ब्रह्ममुहूर्त में धर्मराज, संध्याकाल में शनिदेव का वास होता है. इसलिए आधी रात के समय पीपल के नीचे जाने से मना किया जाता है.

- छठ पूजा एकमात्र पर्व है जिसमें सूर्य उदय के साथ डूबते सूर्य को अर्घ्य  दिया जाता है.इस व्रत को करने से सम्पूर्ण सुख मिलते हैं. पति एवं पुत्र दीर्घायु होते हैं.

- षष्टी, प्रतिपदा और अमावस को दातुन नहीं करना चाहिए.

- षष्टी को तेल लगाना निषिद्व है.

- अष्टमी को मांस खाना निषिद्व है.

- चतुर्दशी को बाल कटवाना, दाढ़ी बनवाना निषिद्व है.

- अमावस को कामक्रीड़ा न करें.

- ज्योतिष वारिधि के अनुसार ग्रह की अंगूठी निम्न धातुओं में बनवानी चाहिए.

सूर्य – तांबा, स्वर्ण, प्लेटिनम.

चन्द्र – चाँदी.

मंगल – रक्तवर्ण तांबा.

बुध – पीतल.

गुरु – स्वर्ण.

शुक्र – कांसा.

शनि – लोहा.

राहु – टिन.

केतु – सीसा.

ग्रहों की दक्षिणा

सूर्य की प्रसन्नता के लिए धेनु, चंद्रमा की प्रसन्नता के लिए शंख, मंगल की प्रसन्नता के लिए लाल बैल, बुध की प्रसन्नता के लिए सोना, गुरु की प्रसन्नता के लिए पीताम्बर, शुक्र की प्रसन्नता के लिए सफ़ेद घोड़ा, शनि की प्रसन्नता के लिए काली गौ, राहु की प्रसन्नता के लिए बकरा ब्रह्मण को दान में देना चाहिए.

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