जाग मुकद्दर उल्लू बोला

Written by sdmadan. Posted in तंत्र

तंत्र शास्त्र में लक्ष्मी प्राप्ति के प्रयोगों के लिए उल्लू को बहुत उपयोगी माना जाता है. दन्त कथाओं के आधार पर उल्लू को लक्ष्मी का वहां माना जाता है. लक्ष्मी के वहां के रूप में उल्लू का उल्लेख प्रमाणिक रूप से नहीं मिलता है. यह कहना बहुत कठिन है की किस और कौन से समय से लक्ष्मी के साथ उल्लू का नाम जोड़ा जाने लगा? आधुनिक युग में जब धन दौलत की महिमा को सर्वोपरि माना जाता है. इसे समय में तंत्र जगत को मुकद्दर जगाने वाला माना जाता है. उल्लू नमक पक्षी विश्व के अनेक देशों में पाया जाता है. इसे उल्लू, उलूक आदि नामों से पुकारते हैं. यह पक्षी प्राय तीन प्रकार का होता है – छोटा कद, काला रंग, गर्दन पर कुछ सफेदी , अर्थात शरीर की अपेक्षा गर्दन पर रंग हल्का होता है. इसे घुग्धू कहते हैं. बड़ा कद , सम्पूर्ण शरीर गहरे काले और पीले रंग का होता है. इस प्रकार के पक्षी को उल्लू कहते हैं. उल्लू को सामान्यत अशुभता का सूचक माना जाता है. उल्लू को मृत्यु का मुख माना जाता है. तंत्र जगत की अघोर साधना में उल्लू को भूखा रखकर उसकी सिद्धि की जाती है. सिद्ध उल्लू के द्वारा किये गए वशीकरण , उच्चाटन और धन प्राप्ति के लिए किये गए प्रयोग आश्चर्यजनक रूप से तीव्र फलदायक होते हैं. उल्लू का घर में घुसना अशुभ होता है. स्वप्न में उल्लू का फल – स्वप्न में उल्लू पानी पिता दिखाई दे तो मुकदमे में सफलता और सजा से मुक्ति मिलती है. स्वप्न में उल्लू जाल में फंसा हुआ दिखाई दे तो मित्र की सहायता से धन का लाभ होता है. [अधिक जानकारी के लिए ग्रह शक्ति का सितम्बर 2004 अंक पढ़ें. ]

अतुल स्म्रद्धिदायक है दो पूंछ वाली छिपकली

Written by sdmadan. Posted in तंत्र

तंत्र जगत में छिपकली का अपना अलग ही महत्व है. छिपकली जो हर घर में दो, चार, छ होती ही हैं. छिपकली को लेकर पुरे विश्व में बहुत सी बरातिया या अलग-अलग किद्वान्तियाई मिलती हैं. हमारे हिन्दू समाज में तो और भी jayda विस्फोटक बाते हैं. वो इतनी विस्फोटक हैं की उन बातो के खुआब में फसकर बहुत सी महिलाय पागल तक हो गयी हैं. बहुत सी महिलाय जीवन भर शारीरिक बीमारी की विपत्तियों के गहरे कुहें में गिर जाती हैं. छिपकली घर-घर में होती हैं लेकिन इनमें से एक दो पूछ की छिपकली भी होती है जो बहुत ही शुभ होती है. दो पूछ की छिपकली को लक्ष्मी की संज्ञा दी गयी है. किसी व्यक्ति को सुबह उठते ही यदि दो पूछ की छिपकली के दर्शन हो जाइ तो उसका सारा दिन बहुत सुख और रुके कार्यु को करने वाला बन जाता है. शनि प्रभावित व्यक्ति के घर में दो पूछ की छिपकली आजाय तो उस व्यक्ति का शनि बहुत अनर्थ नहीं कर सकता. भयंकर शनि से पीड़ित व्यक्ति उस समय रहत की साँस ले सकता है. जब उसके घर सुओथ ही दो पूछ की छिपकली आजाए. यदि घर की रसोही में दो पूछ की छिपकली आ जाये तो उस रसोही में किसी भी सामान की कमी नहीं होगी. यदि दो पूछ की छिपकली पुरे घर में रहे तो उसे देवीय करपा ही माननी चहिये. यदि सयन कक्ष में दो पूछ की छिपकली अपनी मर्जी से रहे तो घर में शान्ति का माहोल रहता है. यदि सोचाल्य में दो पूछ की छिपकली रहे तो उस समय लक्ष्मी की करपा होने लगती है. इनकम के कई रास्ते खुल जाते है. यदि दुकान में हो तो दुकान पहले से जादा चलने लगती है तथा पहले से जादा आमदंनी होती है. हर मामले में दो पूछ की छिपकली उत्तम है. दो पूछ की छिपकली दैवीय किरपा है. इसे लोगो ने गलत तरीके से प्रचारित किया है. इसकी पूछ को काटकर डिब्बी में rakne इसको काटकर बॉक्स में रकने तथा किसी के घर से जबरदस्ती अपने घर लाने का बहुत प्रचार है. कानपूर के एक सेठ सुन्दरलाल अगरवाल की पत्नी को किसी पड़ोसी महिला ने सुना रखा था की दो पूछ की छिपकली की पूछ काटकर डिब्बी में रखकर उसे घर के जेबरौ के साथ रखने से धन- धान्य की कभी कमी नहीं रहती है तथा दिनों-दिन बड़ता ही जाता है. सो उन्होंने एक दिन एक दो पूछ की छिपकली की पूछ काटकर डिब्बी में रख ली.

तिलक

Written by sdmadan. Posted in उपाय, तंत्र

तिलक को भारतीय संस्कृति में महत्वपूर्ण माना गया है. विभिन्न प्रकार के धार्मिक कार्यों में तिलक आवश्यक रूप से किया जाता है. इसके अतिरिक्त हमारी संस्कृति परंपरा के अनुसार आगंतुकों को सम्मान स्वरुप तिलक लगाकर उनका स्वागत किया जाता है. तिलक धारण करने के सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपराजनित कारणों के अतिरिक्त तिलक की उपयोगिता के पीछे कुछ वैज्ञानिक कारण भी हैं. तिलक प्राय: माथे पर लगाया जाता है. तथा माथे पर जिस स्थान पर होकर तिलक लगाया जाता है वहां पर होकर सुषुम्ना नाड़ी प्रवाहित होती है. सुषुम्ना नाड़ी ह्रदय से निकलकर मस्तिष्क के सम्मुख ब्रह्मरंद्र में जाती है. इस कारण तिलक आध्यात्मिक नजरिये से उन्नतिकारक होता है. हमारी ज्ञानेन्द्रियों का विचारक केंद्र बिंदु स्थल दोनों भोंहों और माथे का मध्य भाग होता है. अतः इस स्थान पर तिलक लगाने से हमारी इन्द्रियां प्रभावित होती हैं. तिलक लगाने से संकल्पों को बल मिलता है. तिलक का तांत्रिक नजरिये से बहुत महत्व है. किसी व्यक्ति को अनुकूल और वश में करने के लिए विशिष्ट वस्तुओ का मिश्रण बनाकर तिलक के रूप में प्रयोग किया जाता है. सफ़ेद गुंजा को छाया में सुखाकर कपिला गाय के दूध में घिसकर तिलक करने से सभी लोग वश में हो जाते हैं. आंवले के रस में मेंसिल और असगंध मिलकर माथे पर तिलक करने से सभी व्यक्ति वश में हो जाते हैं. रविवार के दिन काले धतूरे के फल पत्ते, शाखाओं, और जड़ों को लाकर उसमें कपूर, केसर और गौरोचन को मिलकर उन्हें पीस लें. इस मिश्रित पदार्थ का माथे पर तिलक करने से साक्षात् अरुंधती के सामान स्त्री भी वश में हो जाती है. तिलक करके कभी भी सोना नहीं चाहिए.

वशीकरण करता है – ब्लू टोपाज रत्न

Written by sdmadan. Posted in तंत्र, यन्त्र

रत्नों के प्रभाव से सभी परिचित हैं. एक सामान्यजन से लेकर धन – एश्वर्य से परिपूर्ण, शाशन और सत्ता के उच्चाधिकारी तथा पढ़े – लिखे आधुनिक विचारधारा के बुद्धि जीवी तक सभी को रत्न धारण किये हुए देखा जा सकता है. सभी रत्नों का प्रभाव अलग – अलग होता है. कुछ रत्न ग्रहों की शांति के लिए तो कुछ रत्न कार्य सिद्धि के लिए धारण किये जाते हैं. रत्नों में अनेक विशिष्ठ प्रभावशाली भी होते है. एसा ही एक रत्न है – ब्लू टोपाज. इस रत्न को धारण करने वाला व्यक्ति दूसरों को अपने वश में करने में सफल होता है. वह सभी का प्रिय बन जाता है.  ब्लू टोपाज को धारण करने से इच्छित व्यक्ति को वश में किया जा सकता है. इसी कारण से प्रेमी जनों के लिए यह बहुत कम का रत्न बन चुका है. जो लड़का मनचाहा  प्यार पाना चाहता है. वह ब्लू टोपाज को धारण करके चमत्कार देख सकता है. इसी तरह जो लड़की मन ही मन किसी लड़के को दिल दे बैठी हो उसे ब्लू टोपाज धारण करके इसका अद्भुत प्रभाव स्वयं परख लेना चाहिए. प्रेमियों के लिए यह एक अचूक वरदान है. प्रेम – प्रसंग की सफलता के लिए इसे धारण करना आवश्यक है. यदि प्रेमी – प्रेमिका दोनों ही इस रत्न को धारण करें तो उनमें अटूट प्यार बना रहता है. प्रेम विवाह करने वाले लोगों को भी शादी के बाद ब्लू टोपाज को अवश्य धारण करना चाहिए  ताकि उनमें प्यार बना रहे और उनकी शादी सफल सिद्ध हो.
ब्लू टोपाज आसमानी रंग का पारदर्शी और चमकदार पत्थर होता है. यह देखने में मनभावन प्रतीत होता है.  इसकी आभा देखने वाले व्यक्ति को वशीभूत कर लेती है.
यदि किसी व्यक्ति को ब्लू टोपाज रत्न धारण करना हो तो उसे धारण करने से पूर्व इसे अभिमंत्रित करा लेना चाहिए. यदि ब्लू टोपाज को अभिमंत्रित नहीं किया जाये तो वह प्रभाव नहीं दे पाता है.
ब्लू टोपाज को दाहिने हाथ की मध्यमा अंगुली में सोने की अंगूठी में धारण करना चाहिए. इसे धारण करने के लिए गुरुवार और शनिवार के दिन शुभ होते हैं. ब्लू टोपाज को कोई भी व्यक्ति धारण कर सकता है. इसके धारण करने से कोई भी ख़राब परिणाम नहीं मिलते. सभी राशि के व्यक्ति इसे धारण कर सकते हैं. जिन नव विवाहितों के बीच परस्पर आकर्षण की कमी हो उन्हें ब्लू टोपाज जरुर पहनना चाहिए.

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