वशीकरण करता है – ब्लू टोपाज रत्न

Written by sdmadan. Posted in तंत्र, यन्त्र

रत्नों के प्रभाव से सभी परिचित हैं. एक सामान्यजन से लेकर धन – एश्वर्य से परिपूर्ण, शाशन और सत्ता के उच्चाधिकारी तथा पढ़े – लिखे आधुनिक विचारधारा के बुद्धि जीवी तक सभी को रत्न धारण किये हुए देखा जा सकता है. सभी रत्नों का प्रभाव अलग – अलग होता है. कुछ रत्न ग्रहों की शांति के लिए तो कुछ रत्न कार्य सिद्धि के लिए धारण किये जाते हैं. रत्नों में अनेक विशिष्ठ प्रभावशाली भी होते है. एसा ही एक रत्न है – ब्लू टोपाज. इस रत्न को धारण करने वाला व्यक्ति दूसरों को अपने वश में करने में सफल होता है. वह सभी का प्रिय बन जाता है.  ब्लू टोपाज को धारण करने से इच्छित व्यक्ति को वश में किया जा सकता है. इसी कारण से प्रेमी जनों के लिए यह बहुत कम का रत्न बन चुका है. जो लड़का मनचाहा  प्यार पाना चाहता है. वह ब्लू टोपाज को धारण करके चमत्कार देख सकता है. इसी तरह जो लड़की मन ही मन किसी लड़के को दिल दे बैठी हो उसे ब्लू टोपाज धारण करके इसका अद्भुत प्रभाव स्वयं परख लेना चाहिए. प्रेमियों के लिए यह एक अचूक वरदान है. प्रेम – प्रसंग की सफलता के लिए इसे धारण करना आवश्यक है. यदि प्रेमी – प्रेमिका दोनों ही इस रत्न को धारण करें तो उनमें अटूट प्यार बना रहता है. प्रेम विवाह करने वाले लोगों को भी शादी के बाद ब्लू टोपाज को अवश्य धारण करना चाहिए  ताकि उनमें प्यार बना रहे और उनकी शादी सफल सिद्ध हो.
ब्लू टोपाज आसमानी रंग का पारदर्शी और चमकदार पत्थर होता है. यह देखने में मनभावन प्रतीत होता है.  इसकी आभा देखने वाले व्यक्ति को वशीभूत कर लेती है.
यदि किसी व्यक्ति को ब्लू टोपाज रत्न धारण करना हो तो उसे धारण करने से पूर्व इसे अभिमंत्रित करा लेना चाहिए. यदि ब्लू टोपाज को अभिमंत्रित नहीं किया जाये तो वह प्रभाव नहीं दे पाता है.
ब्लू टोपाज को दाहिने हाथ की मध्यमा अंगुली में सोने की अंगूठी में धारण करना चाहिए. इसे धारण करने के लिए गुरुवार और शनिवार के दिन शुभ होते हैं. ब्लू टोपाज को कोई भी व्यक्ति धारण कर सकता है. इसके धारण करने से कोई भी ख़राब परिणाम नहीं मिलते. सभी राशि के व्यक्ति इसे धारण कर सकते हैं. जिन नव विवाहितों के बीच परस्पर आकर्षण की कमी हो उन्हें ब्लू टोपाज जरुर पहनना चाहिए.

असफलता नाशक गणेश शंख

Written by sdmadan. Posted in उपाय, धर्म, यन्त्र

हमारे धार्मिक संसार में अनेक ऐसी पूजन वस्तुए मिलती हैं जो की अपने आप में अनूठी और विचित्र होती हैं. जिनका उपयोग करके हम अपने जीवन को अधिक अनुकूल और सुखी बना सकते हैं. ऐसी ही एक वस्तु है – गणेश शंख. समुद्र मंथन के समय देव – दानव संघर्ष के दौरान समुद्र से 14 अनमोल रत्नों की प्राप्ति हुई. जिनमें आठवें रत्न के रूप में शंखों का जन्म हुआ. जिनमें सर्वप्रथम पूजित देव गणेश के आकर के गणेश शंख का प्रादुर्भाव हुआ जिसे गणेश शंख कहा जाता है. इसे प्रकृति का चमत्कार कहें या गणेश जी की कृपा की इसकी आकृति और शक्ति हू – ब – हू गणेश जी जैसी है. गणेश शंख प्रकृति का मनुष्य के लिए अनूठा उपहार है. निशित रूप से वे व्यक्ति परम सौभाग्यशाली होते हैं जिनके पास या घर में गणेश शंख का पूजन दर्शन होता है. भगवान गणेश सर्वप्रथम पूजित देवता हैं. इनके अनेक स्वरूपों में यथा – विघ्न नाशक गणेश, दरिद्रतानाशक गणेश, कर्ज मुक्तिदाता गणेश, लक्ष्मी विनायक गणेश, बाधा विनाशक गणेश, शत्रुहर्ता गणेश, वास्तु विनायक गणेश, मंगल कार्य गणेश आदि – आदि अनेकों नाम और स्वरुप गणेश जी के जन सामान्य में व्याप्त हैं. गणेश जी की कृपा से सभी प्रकार की विघ्न – बाधा और दरिद्रता दूर होती है. जहाँ दक्षिणावर्ती शंख का उपयोग केवल केवल और केवल लक्ष्मी प्राप्ति के लिए किया जाता है. वहीँ श्री गणेश शंख का पूजन जीवन के सभी क्षेत्रों की उन्नति और विघ्न बाधा की शांति हेतु किया जाता है. गणेश शंख आसानी से नहीं मिलने के कारण दुर्लभ होता है. सौभाग्य उदय होने पर ही इसकी प्राप्ति होती है. इस भौतिक अर्थ प्रधान प्रतिस्पर्धा के युग में बिना अर्थ सब व्यर्थ है. आर्थिक , व्यापारिक और पारिवारिक समस्याओं से मुक्ति पाने का श्रेष्ठ उपाय श्री गणेश शंख है. अपमानजनक कर्ज बाधा इसकी स्थापना से दूर हो जाती है. इस शंख की आकृति भगवान गणपति के सामान है. शंख में निहित सूंड का रंग अद्भुत प्राकृतिक सौन्दर्य युक्त है. प्रकृति के रहस्य की अनोखी झलक गणेश शंख के दर्शन से मिलती है. विधिवत सिद्ध और प्राण प्रतिष्ठित गणेश शंख की स्थापना चमत्कारिक अनुभूति होती ही है. किसी भी बुधवार को प्रातः स्नान आदि से निवृत्ति होकर विधिवत प्राण प्रतिष्ठित श्री गणेश शंख को अपने घर या व्यापार स्थल के पूजा घर में रख कर धूप – दीप पुष्प से संक्षिप्त पूजन करके रखें. ये अपने आप में चैतन्य शंख है. इसकी स्थापना मात्र से ही गणेश कृपा की अनुभूति होने लगाती है. इसके सम्मुख नित्य धूप – दीप जलना ही पर्याप्त है किसी जटिल विधि – विधान से पूजा करने की जरुरत नहीं है.

दुर्लभ बीसा यन्त्र

Written by sdmadan. Posted in यन्त्र

हमारे  ऋषियों ने दुर्लभ बीसा यंत्रों के विषय में अति गोपनीय रहस्यों को संयोजित करके रखा है.
वैसे इस सन्दर्भ में एक कहावत भी प्रचलित है -  जहाँ है यन्त्र बीसा , तहां कहा करै जगदीसा . बीसा यन्त्र हरेक देवी – देवता के लिए अलग – अलग होता है. यह जातक के प्रयोजन के अनुसार भिन्न होता है. प्राचीन काल से ही दुर्गा जी के चित्र के नीचे बीसा यन्त्र आपने अवश्य देखा होगा. 
बीसा  यन्त्र की निर्माण विधि -
इस यन्त्र का निर्माण होली, दिवाली, विजयदशमी, नवरात्र, बसंत पंचमी, मकर संक्रांति, राम नवमी, जन्माष्टमी या फिर रवि पुष्य और गुरु पुष्य योग के समय भोजपत्र पर अष्टगंध या लेसर – कुंकुम आदि को गंगाजल में घोल कर अनार या चमेली की कलम से लिखें. फिर उसका विधि पूर्वक पूजन करके सम्बंधित मंत्र का जप और हवन करके बीसा यन्त्र को सिद्ध किया जाता है सिद्ध होने के बाद बीसा यन्त्र तुरंत फल देने लगता है. इस सिद्ध यन्त्र को ताबीज में भरकर लाल डोरे में बंधकर गले में पहन सकते हैं. इन यंत्रों का निर्माण स्वर्ण , चाँदी या ताम्बे पर कराकर पूजन स्थल पर रखने और नित्य धुप -दीप दिखाकर पूजन करने से आपको इसका प्रभाव स्पष्ट दिखने लगेगा.
सर्व सिद्धि दाता माँ दुर्गा जी का सिद्ध यन्त्र -
इस यन्त्र को बनाकर नवार्ण मंत्र का बीस हजार जप करके दशांश हवन करके सिद्ध किया जाता है. नवार्ण मंत्र इस प्रकार है - ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाये   विच्चे.
इस यन्त्र को ताबीज में भरकर धारण किया जा सकता है. या धातु पत्र पर अंकित कराकर पूजा घर में रखा जा सकता है.
भक्ति भाव जगाने हेतु बीसा यन्त्र -
इस बीसा महायंत्र को भोजपत्र पर बना कर नित्य पंचोपचार विधि से पूजन करें. यन्त्र का निर्माण दिए गए चित्र के अनुसार कराना है. ॐ ह्रीं श्रीं परमेश्व स्वाहा मंत्र का बीस हजार जप करके इसका दशांश हवन करने से यह यन्त्र चैतन्य हो जाता है. इसके दर्शन और पूजा से दैहिक , दैविक और भौतिक त्रयतापों से मुक्ति तथा ईश्वर के प्रति भक्ति – भावना में वृद्धि होती है.
सर्व व्याधिहरण बीसा यन्त्र – अमावस्या के दिन इस यन्त्र को अष्टगंध की स्याही से भोजपत्र पर पीपल की लकड़ी की कलम से लिखना है. इस यन्त्र को हनुमान को दाहिने रखकर

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