प्रबल भाग्योदय के लिए लाल किताब के टोटके

Written by sdmadan. Posted in लाल किताब

जिस व्यक्ति की कुंडली में नवम भाव बली एवं शुभ होता है वह व्यक्ति अल्प प्रयत्न से ही सफलता की ऊंचाई पर भी पहुच जाता है. यह भाग्य का ही खेल है की समय के बदलते चक्र के साथ कोई सेठ दिवालिया हो जाता है. तो कोई नौकर सेठ बन जाता है. जिस व्यक्ति की कुंडली में नवम भाव एवं उसका स्वामी दूषित हो या निर्बल हो तो उस व्यक्ति को भाग्यवश अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ता है. पग पग पर रुकावटें उत्पन्न होती हैं. ऐसे व्यक्ति की सफलता स्थाई नहीं होती. ऐसा नहीं है की जिस व्यक्ति की कुंडली में भाग्य भाव का स्वामी निर्बल एवं अशुभ स्थिति में हो वह जीवन में उन्नति ही नहीं करेगा. यदि जन्म कुंडली में अन्य ग्रह योग शुभ हों तो जातक की उन्नति तो अवश्य होगी किन्तु वह स्थाई नहीं होगी. सफलता मिलने के बाद भी असफलता का सामना करना होगा. इस बात को व्यवाहरिक रूप से इस प्रकार समझा जा सकता है की जैसे किसी राजनेता की कुंडली में भाग्य भाव का स्वामी पीड़ित हो तो उसे सत्ता सुख में अनेक बाधा का सामना करना होगा. यदि वह मंत्री बन जाय तो विवाद में पड़कर उसे कुर्सी छोड़नी पड़ेगी. वह अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पायेगा. अपने दल के अध्यक्ष या अन्य बड़े नेता से वैचारिक तालमेल के अभाव में उसे पार्टी भी छोड़नी पड़ सकती है.

मेष लग्न के व्यक्ति के भाग्य का स्वामी गुरु होता है. मेष लग्न के व्यक्ति को अपना भाग्य प्रबल करने के लिए ब्रहस्पतिवार के दिन किसी मंदिर में केले के पौधे को रोपकर उसकी देखभाल करते रहना चाहिए. किसी पूज्य व्यक्ति को पीले रंग के वस्त्रो या स्वर्ण आभूषणों का दान करना चाहिए. यदि मंदिर की बुर्जी पर जातक पीले रंग का ध्वज अपने हाथ से फहराए तो उसका भाग्य उसी दिन से बुलंद होना शुरु हो जाता हैअधिक जानकारी के लिए ग्रह शक्ति के oct 2004 अंक को पढ़ें

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