सोलह संस्कार

Written by sdmadan. Posted in धर्म, संस्कृति

भारतीय संस्कृति संस्कारों पर ही आधारित है. प्राचीन काल में किसी भी व्यक्ति के प्रत्येक कार्य का शुभारम्भ संस्कार से होता था. वर्तमान में समय और विश्वास की कमी के चलते संस्कारों की संख्या 40 से घटकर 16 रह गई है. सभी पौराणिक धर्मशास्त्रों में संस्कार की आवश्यकता बताई गई है. जैसे खान से सोना निकलने पर सोने में चमक प्रकाश और सौन्दर्य के लिए उसे तपाकर अशुद्धियाँ निकलना जरुरी होता है ठीक उसी तरह मनुष्य की योग्यता और शक्तियों को जाग्रत करने के लिए उसका संस्कारवान होना आवश्यक है.

किसी भी व्यक्ति के व्यक्तितत्व का विकास चरित्र से होता है और चरित्र से ही मनुष्य की विशिष्ठ पहचान बनती है. चरित्र का बल आत्मा का बल है. परिस्थितियों के प्रति मन की प्रतिक्रिया चरित्र का निर्माण करती है. यह प्रतिक्रिया स्वस्थ बनाना ही संस्कार है. चरित्र ही आत्मबल का व्यवहारिक रूप है.

सोलह संस्कारों का विवरण आगे दिया जा रहा है -

1. गर्भाधान संस्कार

2. पुंसवन संस्कार

3. सीमान्तोन्न्यन संस्कार

4. जातकर्म संस्कार

5. नामकरण संस्कार

6. निष्क्रमण संस्कार

7. अन्नप्राशन संस्कार

8. कर्णवेध संस्कार

9. विद्यारम्भ संस्कार

10. चूड़ाकर्म संस्कार

11. यज्ञोपवीत संस्कार

12. वेदारम्भ संस्कार

13. केशांत संस्कार

14. समावर्तन संस्कार

15. विवाह संस्कार

16. अंत्येष्टि संस्कार

कृष्णामूर्ति पद्धति के चमत्कारिक सिद्धांत

Written by sdmadan. Posted in संस्कृति

कृष्णामूर्ति पद्धति के चमत्कारिक सिद्धांत  
दक्षिण भारत में जन्मी कृष्णामूर्ति पद्धति में अनेक ऐसे चमत्कारिक सिद्धांतों के बारे में बताया गया है जिसकी सहायता से सटीक भविष्वाणी किया जाना संभव है. ऐसे ही एक चमत्कारिक सिद्धांत के बारे में इस लेख में बताया जा रहा है. ज्योतिष में कुंडली मिलान को  महत्वपूर्ण मानकर उसके सन्दर्भ में अनेक उपयोगी दिशा निर्देश दिए गए हैं. तथा भावी वर – वधु की कुंडली मिलान के बारे में अनेक सूत्र बताये गए हैं. सामान्य तौर पर कुंडली मिलान में अश्कुत गुण मिलान तथा मांगलिक मिलान का विचार किया जाता है. इन दोनों मिलानों के द्वारा वर – वधु के जीवन पर एक दूसरे के ग्रहों के शुभ और अशुभ प्रभावों का आकलन किया जाता है. पारंपरिक भारतीय ज्योतिष में यह विवरण नहीं मिलता कि जिससे यह जाना जा सके कि कुंडली मिलान की जज रही कुंडलियों में विवाह होने के संभावना कितनी है. इस सन्दर्भ में कृष्णामूर्ति पद्धति का सिद्धांत बहुत सटीक और चमत्कारिक फल देने वाला है.  जिसकी सहायता से यह जाना जा सकता है कि जिन व्यक्तित्यों की कुण्डलियाँ मिली जा रही हैं उनका विवाह होगा या नहीं. यदि एक लडके की कुंडली के साथ अनेक लड़कियों की कुण्डलियाँ मिलान के लिए आई हों या एक लड़की की कुंडली के साथ अनेक लड़कों की कुंडलियाँ मिलान के लिए आई हों तो लडके या लड़की का विवाह उनमें से किस कुंडली वाले लड़के या लड़की से होगा या उनमे से किसी के साथ नहीं होगा इसका निर्णय कृष्णामूर्ति पद्धति के आधार पर किया जा सकता है.
यदि लड़के की कुंडली के शाशक ग्रह लड़की की कुंडली के अनुसार वर्तमान दशा, अंतर दशा एवं प्रत्यंतर दशा   से मेल खाते हों तथा लड़की की कुंडली के शाशक ग्रह लड़के की वर्तमान दशा, अंतर दशा एवं प्रत्यंतर दशा से मेल खाते हों तो इसे लड़के – लड़की का वीकः अवश्य होता है. यदि लड़के की कुंडली के शाशक ग्रह लड़की की वर्तमान दशाओं वाले ग्रह नहीं हों तथा लड़की की कुंडली के शाशक ग्रह लड़के की वर्तमान दशाओं वाले ग्रह नहीं हों तो उनमें विवाह नहीं होता. इसे अग्रलिखित उदाहरण से समझा जा सकता है -
लड़के की कुंडली का विवरण :-
शाशक ग्रह
जन्म दिन का स्वामी – शनि
चन्द्र राशी का स्वामी – मंगल
चन्द्र नक्षत्र का स्वामी – शनि
लग्न स्वामी – गुरु
लग्न नक्षत्र का स्वामी – शनि
महादशा स्वामी – शुक्र
अंतर दशा स्वामी – चन्द्र
प्रत्यंतर दशा स्वामी – मंगल
लड़की की कुंडली का विवरण
शाशक ग्रह -
जन्म दिन का स्वामी – शुक्र
चन्द्र राशी का स्वामी – शुक्र
चन्द्र नक्षत्र का स्वामी – चन्द्र
लग्न स्वामी – मंगल
लग्न नक्षत्र का स्वामी -  ketu
महादशा स्वामी – गुरु
अंतर दशा स्वामी – शनि
प्रत्यंतर दशा स्वामी – शनि
जन्म कुंडली मिलन हेतु आई लड़के एवं लड़की की कुंडली में यह विवरण नोट कर लें .  इन दोनों कुंडलियों में शाशक ग्रह और दशाओं में ऊपर दिया गया सूत्र पूरी तरह से लागू होता है. लड़के की कुंडली के जो शाशक ग्रह हैं वो लड़की की दशा एवं अंतर दशा के ग्रह हैं. तथा लड़की की कुंडली के शाशक ग्रह की दशाएं लड़के के जीवन में चल रही हैं. इससे स्पष्ट होता है की इन दोनों लड़के एवं लड़की का विवाह होना निश्चित  है.  यदि एक साथ बहुत सी कुंडलियों का मिलान किसी एक कुंडली के साथ करना हो तथा कई कुंडलियों से अच्छा मिलान हो रहा हो तो कृष्णामूर्ति पद्धति के इस चमत्कारिक सिद्धांत के द्वारा जाना जा सकता है कि विवाह सम्बन्ध किस कुंडली वाले जातक से होना सुनिश्चित है.  

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