मंगली दोष निवारण के सरल उपाय

Written by sdmadan. Posted in उपाय

जिस व्यक्ति की कुंडली में मंगली दोष बन रहा हो उस व्यक्ति को अग्रलिखित उपाय करने चाहिए जिससे की मंगली दोष के नकारात्मक प्रभाव से वह बच सकें -
- मीठी रोटियां दान करें .
- मंगलवार को सुन्दरकाण्ड का पाठ करें. 
- बंदरों को लाल मीठी वास्तु खिलाएं.
- मंगलवार को बतासे या रेवड़ियाँ पानी में प्रवाहित करें.
- आटे की लोई में गुड़ रखकर गाय को खिला दें.
- मंगली कन्यायें गौरी पूजन तथा श्रीमद्भागवत के 18 वें अध्याय के नवें श्लोक का जप अवश्य  करें.
- प्रत्येक मंगलवार को मंगल स्नान करें.
- विवाह के समय कुंडली मिलान अवश्य करें.

मंगल स्नान

Written by sdmadan. Posted in धर्म

जिस व्यक्ति पर मंगल ग्रह की महादशा या अन्तर्दशा चल रही हो  उसे मंगल ग्रह को शुभ बनाने के लिए अग्रलिखित वस्तुओं को एकत्रित करके पानी में डालकर उस पानी से स्नान करना चाहिए. मंगल स्नान की वस्तुएं – सोंठ, सोंफ, मौलसिरी के फूल, सिंगरक, मॉल कंगनी और लाल चन्दन. इन सभी को एक साथ पानी में भिगोकर  एक रत के लिए रख दें दूसरे दिन सुबह पानी को छानकर  उससे स्नान कर लें. इन वस्तुओं को पानी में डालने के लिए मिट्टी के कलश का प्रयोग किया जा सकता है. मंगल ग्रह के कारन हो रही रोग पीड़ा को शांत  करने के लिए भी यह प्रयोग बहुत उपयोगी है.  जिस  मंगली कन्या के विवाह में विलम्ब हो रहा हो उसे भी यह प्रयोग करना चाहिए. यह प्रयोग शुक्ल पक्ष में मंगलवार को शुरू करना है. प्रत्येक मंगलवार को यह स्नान करना है.

अतुलनीय धन सम्पदा हेतु श्रीमद्भागवत का विलक्षण अनुष्ठान

Written by sdmadan. Posted in धर्म

धन लाभ के लिए हमें जो उपाय करने चाहिए उनमें से एक अत्यंत प्रभावशाली और त्वरित फल देने वाले उपाय के बारे में श्रीमद्भागवत के अष्टम स्कंध के अष्टम अध्याय के आठवें श्लोक में बताया गया है कि महापुराण श्रीमद्भागवत के अष्टम स्कंध के अष्टम अध्याय के आठवें श्लोक का आठ वर्ष या आठ मास तक सविधि निरंतर पाठ, अनुष्ठान अथवा जप करने से साधक शीघ्र ही दूसरा कुबेर बन जाता है. यह एक अमोघ प्रयोग है जिसका श्रद्धा और विश्वास के साथ नियमित प्रयोग करने या कराने से महालक्ष्मी की परम कृपा प्राप्त होती है. यह अनुष्ठान दृढ संकल्प के साथ शुभ मुहुर्त में आरम्भ करें तो अनुष्ठान की सफलता में संदेह नहीं रहता .

सूर्य किरणें हैं रोगनाशक

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ज्योतिष में सूर्य को ब्रह्माण्ड  का पिता माना गया है. सारे जगत की उत्पत्ति सूर्य से हुई है. सूर्य को ज्योतिष में आत्म शक्ति का करक गृह माना गया है. चिकित्सा का ग्रह भी सूर्य ही तो है. सूर्य में रोग निवारण की अद्भुत शक्ति होती है. सूर्य की शक्ति सूर्य की प्रातः  कालीन किरणों  के द्वारा हम तक पहुंचती है. सूर्य प्रकाश से शरीर में प्राणों का संचार होता है. जिसकी आवश्यकता हमें सदा रहती है. यही कारण है कि हमें सोने, बैठने और रहने के स्थान को हवादार और प्रकाशमय रखना चाहिए. जिस घर में सूर्य का प्रकाश नहीं होता वहां पर डॉक्टर का प्रवेश होता है. इस कहावत  में सत्यता छिपी हुई है. क्योंकि रोगों के कीटाणुओं की अंधकारमय जगह में ही वृद्धि होती है. सूर्य कि किरणें रोगाणुओं के लिए काल के समान होती हैं.  

लम्बी उम्र का सरल उपाय

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लम्बी उम्र का सरल उपाय महर्षि चरक के अनुसार लम्बी आयु के लिए प्रातः काल ब्रह्म मुहुर्त में उठाना चाहिए. इससे स्वास्थ्य अच्छा रहता है उम्र बढती है. सूर्य उदय के समय की प्राण वायु तथा सूर्य उदय से 1 .5 से 2 घंटे तक की सूर्य किरणों में शरीर और मन को शक्ति देने वाले रचनात्मक तत्व होते हैं. आरोग्य और उन्नति के लिए प्रातः उठना बहुत ही लाभकारी होता है.

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