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हमारे पाप और हमारी पीडाएं

Written by sdmadan. Posted in Other Topics, ज्योतिष

हमारे पाप और हमारी पीडाएं

हम अक्सर लोगों को यह कहते हुए सुनते हैं कि मैंने कभी कोई बुरा काम नहीं किया फिर भी मैं बीमारियों से परेशान हूँ. ऐसा मेरे साथ क्यों हो रहा हैं. क्या भगवान बहुत कठोर और निर्दयी हैं ?

पहली बात तो हमें ये समझ लेनी चाहिए कि हमारे कार्यों और भगवान का कोई सम्बन्ध नहीं है इसलिए हमें अपनी परेशानियों और पीडाओं के लिए ईश्वर को दोषी नहीं मानना चाहिए. यदि आप सह्गुनी हैं तो आप जीवन में संपन्न और सुखी रहते हैं. यदि आप लोगों को सताते हैं या पाप कर्म करते हैं तो आप पीड़ित होते हैं और तरह तरह की बीमारियाँ कष्ट देती हैं. हमारे कार्यों का हम पर निश्चित रूप से असर होता है. कभी हमारे कर्मों का प्रभाव इसी जन्म में तो कभी अगले जन्म में मिलता हैं लेकिन मिलता जरुर है. आशय है कि हम अपने कर्मों के प्रभाव से कभी मुक्त नहीं होते यह बात अलग है कि इसका प्रभाव तुरंत दिखाई न दे .

इस लेख में इस बात का विवरण प्रस्तुत किया जा रहा है कि हमारे पाप हमें किस रूप में लौटकर मिलते हैं और पीड़ित करते हैं. यदि आप किसी रोग से पीड़ित है तो ये समझें कि आपने अवश्य ही कोई पाप पूर्व जन्म में किया है. आपके पाप कर्म द्वारा होने वाली कुछ बीमारियों को साकेंतिक रूप में नीचे दिया जा रहा है.

- लोगों का धन लूटने वाले गले की बीमारी से पीड़ित होते हैं.

- पढ़े लिखे ज्ञानी जन के प्रति दुर्भावना से काम करने वाले व्यक्ति को सिरदर्द की शिकायत रहती है.

- हरे पेड़ काटने वाले और सब्जियों की चोरी करने में लगे व्यक्ति अगले जन्म में शरीर के अन्दर अल्सर (घाव)से पीड़ित होते हैं.

- झूठे और धोखाधड़ी करने वाले लोगों को उल्टी की बीमारी होती है.

- गरीब लोगों का धन चुराने वाले लोगों को कफ और खांसी से कष्ट होता है.

- यदि कोई समाज के श्रेष्ठ पुरुष (विद्वान) की हत्या कर देता है तो उसे तपेदिक रोग होता है.

- गाय का वध करने वाले कुबड़े बनते हैं.

- निर्दोष व्यक्ति का वध करने वाले को कोढ़ होता है.

- जो अपने गुरु का अपमान करता है उसे मिर्गी का रोग होता है.

- वेद और पुराणों का अपमान और निरादर करने वाले व्यक्ति को बार बार पीलिया होता है.

- झूठी गवाही देने वाले व्यक्ति गूंगे हो जाते हैं.

- पुस्तकों और ग्रंथो की चोरी करने वाले व्यक्ति अंधे हो जाते हैं.

- गाय और विद्वानों को लात मरने वाले व्यक्ति अगले जन्म में लगड़े बनते हैं.

- वेदों और उसके अनुयायियों का निरादर करने वाले व्यक्ति को किडनी रोग होता है.

- दूसरों को कटु वचन बोलने वाले अगले जन्म में हृदय रोग से कष्ट पाते हैं.

- जो सांप, घोड़े और गायों का वध करता है वह संतानहीन होता है.

- कपड़े चुराने वालों को चर्म रोग होते हैं.

- परस्त्रीगमन करने वाला अगले जन्म में कुत्ता बनता है.

- जो दान नहीं करता है वह गरीबी में जन्म लेता है.

- आयु में बड़ी स्त्री से सहवास करने से डायबिटीज़ रोग होता है.

- जो अन्य महिलाओं को कामुक नजर से देखता है उसकी आंखें कमजोर होती हैं.

- नमक चुराने वाला व्यक्ति चींटी बनता है.

- जानवरों का शिकार करने वाले बकरे बनते हैं.

- जो ब्राह्मन होकर भी गायत्री मंत्र नहीं पढ़ता वो अगले जन्म में बगुला बनता है.

- जो ज्ञानी और सदाचारी पुरुषों को दिए गए अपने वचन से मुकर जाता है वह अगले जन्म में गीदड़ बनता है.

- जो दुकानदार नकली माल बेचते हैं वे अगले जन्म में उल्लू बनते हैं.

- जो अपनी पत्नी को पसंद नहीं करते वो खच्चर बनते है.

- जो व्यक्ति अपने माता पिता और गुरुजनों का निरादर करता है उसकी गर्भ में ही हत्या हो जाती है.

- मित्र की पत्नी से सम्बन्ध बनाने की इच्छा रखने वाला अगले जन्म में गधा बनता है.

- मदिरा का सेवन करने वाला व्यक्ति भेड़ियाँ बनता है.

- जो स्त्री अपने पति को छोड़कर दूसरे पुरुष के साथ भाग जाती है वह घोड़ी बन जाती है.

पूर्व जन्म में किये गए पापों से उत्त्पन्न रोग कैसे दूर हों ?

पूर्व जन्मार्जितं पापं व्याधि रूपेण व्याधिते,

तछंती: औषधनैधान्ने: जपाहोमा क्रियादिभी:

पूर्व जन्म के जो पाप हमें रोग के रूप में आकर पीड़ित करते हैं उनका निराकरण करने के लिए दवाइयां, दान, मंत्र जप, पूजा, अनुष्ठान करने चाहिए. केवल यह ही नहीं हमें गलत काम करने से भी बचना चाहिए. तभी हम पूर्वजन्म कृत पापों के दुष्प्रभाव से मुक्त हो सकेगें.

जिस प्रकार रोग का निवारण करने से पहले रोग की ठीक ठीक पहचान करना बहुत जरुरी है. रोग की पहचान के बाद ही उसका इलाज किया जाता है उसी प्रकार कुंडली में ग्रह दोषों के आधार पर पूर्व जन्म में किये गए पाप कर्मों को जानकर उनका समाधान कराया जाये तो निश्चय ही रोग पीड़ा से शीघ्रता से मुक्ति होती है. पाठकों को यह जानकर आश्चर्य हो सकता है कि जब मैंने जन्म कुंडली में पूर्व जन्मकृत पापों को जानकर उनका प्राश्यिचत करा दिया तो अनेक ऐसे रोगियों को तत्काल स्वास्थ्य में सुधार आना शुरू हो गया जो लगातार इलाज चलने के बाद भी निरंतर रोगी बने हुए थे. ऐसे व्यक्ति जो बहुत अच्छे चिकित्सक के इलाज के बाद भी रोगी बने हुए हैं वे मुझसे संपर्क करके रोग मुक्त होने के लिए मार्गदर्शन ले सकते हैं. -संपादक

अश्वनी नक्षत्र

इस नक्षत्र की स्थिति राशि चक्र में मेष राशि में शून्य अंश से तेरह अंश बीस कला तक होती है. इस नक्षत्र के स्वामी देव अश्वनी कुमार हैं जो कि देवों के चिकित्सक हैं. इस नक्षत्र की आकृति घोड़े के सिर के समान है. इस नक्षत्र से प्रभावित व्यक्ति घुड़सवार, सैनिक या दैवीय शक्ति संपन्न चिकित्सक (वैद्य) होता है. चिकित्सा का कारक ग्रह अश्वनी नक्षत्र में बैठता है तो वह व्यक्ति सफल चिकित्सक बनता है. इस नक्षत्र का सम्बन्ध ट्रांसपोर्ट (यातायात) या ट्रांसपोर्ट विभाग से होता है. क्योंकि इस नक्षत्र के देव अश्वी जानवरों को सामान लादकर चलते हुए देखे जाते हैं. पुराणों के अनुसार अश्वनी कुमार(जुड़वां भाई) की माता संग और पिता सूर्य हैं. कहा जाता है कि सूर्य के वीर्य के तेज को इनकी माता संग गर्भ में रोक नहीं सकती थी इसलिए उन्होंने सूर्य देव के शुक्र को अपने नथुनों में रख लिया था. इसका कारण अश्वनी नक्षत्र को जुड़वां उत्पत्ति का कारक भी माना जाता है. यदि कुम्भ लग्न हो और मंगल इस नक्षत्र में बैठा हो तो ये जातक के जुड़वां भाई बहिन होने का संकेत देती है. यदि सूर्य ब्रहस्पति या पिता का कारक ग्रह पितृ भाव (9) का स्वामी या पुत्र भाव का स्वामी ग्रह इसी तरह अश्वनी नक्षत्र में बैठा हो तो ऐसे जातक के पिता,चाचा या संतान जुड़वां होती है.

ग्रह दोष निवारण के उपाय

- घर की पूर्व दिशा में लगे हुए किसी भी वट वृक्ष की जड़ को शुभ मुहूर्त में निकालकर पास रखने से राहु ग्रह की पीड़ा शांत होती है.

- यदि राहु ग्रह के अशुभ प्रभाव को दूर करना हो तो जल में २ वट पत्र को डालकर उस जल से स्नान करना चाहिए. यह राहु के दुष्प्रभाव को मिटाने का सरल और प्रभावी तरीका है.

- चतुर्दशी के दिन वट वृक्ष की जड़ में दूध चढ़ाने से देव बाधा दूर होती है.

- गिरी के गोले में छेद करके उसमें मेवा और शक्कर भर दें तथा उसे जमीन  में दबा दें. इससे केतु ग्रह का प्रभाव शांत होता है.

- महालक्ष्मी पूजन के समय सीताफल को शामिल करने से दरिद्रता योग का नाश होता है. दीपावली पर इसे पूजन में रखना शुभ होता है.

- चन्द्र ग्रह की पीड़ा शांत करने हेतु चमेली के पुष्प से चन्द्र पूजन करना चाहिए.

- शिवजी को नित्य चमेली का फूल अर्पित करने से भूत बाधा दूर होती है.

- जिस व्यक्ति को नजर लगी हो तो उसके ऊपर लोहे की कील ११ बार उतारकर गूलर वृक्ष के तने में ठोंक दें नजर उतर जाती है. दुकान,व्यापार की नजर उतारने के लिए भी यह प्रयोग किया जा सकता है.

- किसी भी प्रकार के प्रमेह को दूर करने के लिए गूलर की लकड़ी का शहद और गन्ने के रस के साथ हवन करना चाहिए. इससे डायबिटीज़ का शमन होता है.

- मेष राशि के सूर्य के समय एक मसूर तथा दो नीम की पत्तियों को खाने से एक साल तक सर्प भय नहीं रहता.

- अनिंद्रा की स्थिति में मेहँदी के फूल सिरहाने रखने चाहिए. नींद आती है.

- बांस जलाकर तापने से बीमारी होती है.

- बिल्ब, देवदारु और प्रियंगु की जड़ों को एक साथ कूटकर चूर्ण बना लें. इस चूर्ण की धूनी देने से भूत प्रेत भाग जाते हैं.

- बांस को घर में जलाने से अशांति आती है.

- भविष्य पुराण के अनुसार जो व्यक्ति पलाश का पुष्प शिवजी पर अर्पित करता है उसे भूत बाधा और पितर दोष नहीं सताते हैं.

- बबूल की जड़ में शनिवार को काले तिल चढ़ाने से राहु की पीड़ा शांत होती है. लगातार २१ शनिवार करें.

- व्याधियों के शमन के लिए पलाश के पत्तों की पत्तल में कुछ दिन निरंतर भोजन करना चाहिए.

- अंडी का बीज फैक्ट्री में होने से श्रमिक प्रशासनिक बाधाएँ आती हैं. घर में अंडी का पेड़ अति अशुभ होता है.

- सत्यानाशी की जड़ पास रखने से राहु पीड़ा शांत होती है.

- भरणी नक्षत्र में निकाली गई ग्वारपाठे की जड़ को अपने पास रखने से अस्त्र शस्त्र का भय नहीं रहता.

- हरसिंगार के पुष्प प्रत्येक पूर्णिमा को बाबड़ी में डालने से चन्द्र पीड़ा दूर होती है.

- नवमी तिथि के दिन आंवले के वृक्ष का पूजन करने से सौभाग्य में वृद्वि होती है. वैधव्य का नाश होता है.

- ३ गुलाब, ३ बेला के पुष्प बाबड़ी में डालने से रुका हुआ कार्य बनता है.

चमत्कारिक उपाय

- वाहन को नजर दोष से बचाने के लिए ४ पीले नींबू चारों पहियों से कुचल कर आगे बढे,वाहन दुर्घटना ग्रस्त नहीं होगा.

- अगर आप क्रोधी होते जा रहे हैं तो भोजन के बाद मीठा अवश्य खाएं.

- पीपल वृक्ष को काटने से संतान हानि होती है.

- पीपल वृक्ष पर दिन में देवताओं, रात्रि में असुरों, ब्रह्ममुहूर्त में धर्मराज, संध्याकाल में शनिदेव का वास होता है. इसलिए आधी रात के समय पीपल के नीचे जाने से मना किया जाता है.

- छठ पूजा एकमात्र पर्व है जिसमें सूर्य उदय के साथ डूबते सूर्य को अर्घ्य  दिया जाता है.इस व्रत को करने से सम्पूर्ण सुख मिलते हैं. पति एवं पुत्र दीर्घायु होते हैं.

- षष्टी, प्रतिपदा और अमावस को दातुन नहीं करना चाहिए.

- षष्टी को तेल लगाना निषिद्व है.

- अष्टमी को मांस खाना निषिद्व है.

- चतुर्दशी को बाल कटवाना, दाढ़ी बनवाना निषिद्व है.

- अमावस को कामक्रीड़ा न करें.

- ज्योतिष वारिधि के अनुसार ग्रह की अंगूठी निम्न धातुओं में बनवानी चाहिए.

सूर्य – तांबा, स्वर्ण, प्लेटिनम.

चन्द्र – चाँदी.

मंगल – रक्तवर्ण तांबा.

बुध – पीतल.

गुरु – स्वर्ण.

शुक्र – कांसा.

शनि – लोहा.

राहु – टिन.

केतु – सीसा.

ग्रहों की दक्षिणा

सूर्य की प्रसन्नता के लिए धेनु, चंद्रमा की प्रसन्नता के लिए शंख, मंगल की प्रसन्नता के लिए लाल बैल, बुध की प्रसन्नता के लिए सोना, गुरु की प्रसन्नता के लिए पीताम्बर, शुक्र की प्रसन्नता के लिए सफ़ेद घोड़ा, शनि की प्रसन्नता के लिए काली गौ, राहु की प्रसन्नता के लिए बकरा ब्रह्मण को दान में देना चाहिए.

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